सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 30.pdf/३७

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

१. टिप्पणियाँ विश्वासघात जिस एशियाई विधेयकके पेश किये जानेकी आशंका है, वह समस्त दक्षिण आफ्रिका बारेमें गांधी-स्मट्स समझौते का उल्लंघन है और नेटालके सम्बन्धमें तो विश्वासघात भी है । यह विश्वासघात कैसे है, यह बात दक्षिण आफ्रिकाके अखबारोंको लिखे अपने एक पत्र में श्री एन्ड्रयूजने स्पष्ट बताई है। अभी-अभी 'इंडियन ओपि- नियन' का जो अंक प्राप्त हुआ है, उसमें भी वह पत्र उद्धृत किया गया है। उसका प्रासंगिक अंश निम्न प्रकार है : १८६० से नेटाल सरकार इकरारनामेके अधीन बहुत-से भारतीयोंको भारतसे दक्षिण आफ्रिका लाई । उन लोगोंके भारतसे प्रस्थान करने से पहले भारत सरकार और नेटाल सरकार के बीच तय पाया गया था कि अगर वे गनके खेतों में काम करनेका अपना पाँचसाला इकरार पूरा कर दें तो उन्हें नेटालमें कुछ अधिकार दिये जायें, जिनमें जमीन और अचल सम्पत्ति खरीदने की खुली छूटके साथ-साथ अधिवासका अधिकार भी शामिल था। नेटाल सरकार भारतीय गिरमिटिया मजदूर पानके लिए बहुत आकुल थी, सो उस समय उसने यह भी स्वीकार कर लिया कि इन मजदूरोंके साथ-साथ स्वतन्त्र भार- तीयोंके रूपमें भारतीय व्यापारियोंको भी नेटाल आने दिया जाये । J इन भारतीय मजदूरोंने बहुत भारी कीमत चुकाकर इन अधिकारोंका सौदा किया था । कारण, पाँचसाला गिरमिट प्रथा ऐसे गम्भीर नैतिक दोषोंसे भरी हुई थी कि अब इसे एक भ्रष्ट श्रम-प्रणाली मानकर बिलकुल समाप्त कर दिया गया है। नेटाल सरकार अभी-अभी बिलकुल हालतक अपनी ओरसे अनुबन्धको शर्तोंका पालन करनेकी भरसक कोशिश करती रही है। दक्षिण आफ्रिका अधिनियमके खण्ड १४८ से स्पष्ट है कि नेटाल सरकार द्वारा किये गये करार संघपर भी लागू होते हैं । ('इयर बुक,' पृष्ठ ७४) आर्थिक भ्रान्ति भारतीय प्रवासियोंके खिलाफ अकसर जो आर्थिक दलील दी जाती है, उसका समाधान करते हुए उसी पत्रमें श्री एन्ड्रयूज कहते हैं : दक्षिण आफ्रिका अधिकांश लोगोंके मनपर यह छाप डाल दी गई है। कि भारतीय प्रश्न आर्थिक दृष्टिसे एक बहुत गम्भीर समस्या है, किन्तु वास्तवमें यह उतनी गम्भीर नहीं है। सच तो यह है कि इसका समाधान पहले ही हो चुका है, क्योंकि [ व्यापारके क्षेत्रमें ] भारतीयोंकी स्पर्धा बढ़ नहीं रही है, बल्कि ३०-१ Gandhi Heritage Portal