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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 30.pdf/७०

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३५. बद से बदतर

मद्राससे प्रकाशित 'हिन्दू' अखबार में दक्षिण आफ्रिकी एशियाई विधेयकके खण्ड १० के प्रस्तावित संशोधनका पूरा पाठ छपा है। नीचे में समानान्तर स्तम्भों में प्रस्तावित संशोधन और मूल खण्ड, दोनों उद्धृत कर रहा हूँ :

मूल खण्ड १०, उप-खण्ड २ :

गवर्नर जनरल 'गजट' में घोषणा करके विज्ञापित कर सकता है कि उस तिथिसे या उसके बाद, जो कि घोषणामें निर्धारित की जाये, घोषणामें बताई गई किसी भी जातिका कोई सदस्य इस खण्डके उप-खण्ड (२) में वर्णित तटीय क्षेत्रको छोड़कर नेटाल प्रान्तमें अन्यत्र कहीं भी कोई अचल सम्पत्ति स्वायत्त नहीं करेगा, ऐसी सम्पत्ति पट्टेपर भी नहीं लेगा और न ऐसी सम्पत्तिका पट्टा नया ही करवायेगा, किन्तु इस खण्डकी कोई भी व्यवस्था ऐसी अचल सम्पत्तिका पट्टा नया करानेसे किसी व्यक्तिको नहीं रोकेगी जो इस अधिनियमके लागू होनेके समय उस व्यक्तिके अधिकारमें हो।

संशोधित खण्ड

गवर्नर जनरल 'गजट' में घोषणा करके विज्ञापित कर सकता है कि घोषणामें निर्धारित तिथिसे या उसके बाद—किन्तु यह तिथि अगस्त, १९२५ से पहले की नहीं होगी—घोषणा-पत्रमें बताये गये किसी भी वर्गका कोई व्यक्ति एक तो इस संघकी सीमामें कहीं भी अचल सम्पत्तिको किरायपर नहीं लेगा, न उसको अपने कब्जे में लेगा और न पट्टेदारकी हैसियतसे पाँच सालसे अधिक अवधिके लिए पट्टा ही नया करवायेगा; और दूसरे, केप ऑफ गुड होप और नेटालमें वह कोई अचल सम्पत्ति स्वायत्त नहीं कर सकेगा। हाँ, वह निवासके प्रयोजनोंके लिए वर्गनिवास क्षेत्रमें या व्यापारिक प्रयोजनोंके लिए वर्गव्यापार क्षेत्रमें अथवा किसी भी प्रयोजनके लिए वर्गनिवास और व्यापार क्षेत्र में अचल सम्पत्ति अर्जित कर सकेगा।

मूल खण्ड और संशोधनपर जरा-सी नजर डालनेसे किसी साधारण पाठकको भी स्पष्ट हो जायेगा कि संशोधन मूल खण्डसे लाख दर्जे बुरा है। इस तरह इसमें किसी तरह के समझौतेके लिए प्रयत्नतक नहीं किया गया है, बजाय इसके यह भारतीय लोकमतको, और दरअसल तो भारत सरकारको भी, एक चुनौती है। संघ सरकारका यह रवैया उस प्रबल आन्दोलनके अनुरूप ही है, जो दक्षिण आफ्रिकामें भारतीयोंके विरुद्ध भड़काया गया है।

[अंग्रेजीसे]
यंग इंडिया, १८-२-१९२६