सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 30.pdf/८१

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

४८. पत्र : एस० आर०. • स्कॉटको प्रिय मित्र, साबरमती आश्रम २३ फरवरी, १९२६ मैंने अभीतक आपके इस १७ तारीखके पत्रका उत्तर इसलिए नहीं दिया कि मैं आशा करता था कि आपके १२ तारीखके पत्रके उत्तरमें मैंने जो पत्र' आपको भेजा है, उसका जवाब आप देंगे । गुजराती कवितापर आपके निबन्धको प्रतियोंके लिए धन्यवाद । मुझे वह बहुत पसन्द आया ।' मेरे पिछले पत्रको ध्यान में रखते हुए आप यह बतानेकी कृपा करेंगे कि क्या आप चाहते हैं कि आपका १२ तारीखका पत्र' में प्रकाशित कर दूं । यदि ऐसा चाहते हैं तो स्वाभाविक है कि उसमें पाद-टिप्पणीके रूपमें मैं कुछ उसी ढंगकी बात कहूँ जो मैं आपको अपने पिछले पत्र में लिख चुका हूँ । रेवरेंड एस० आर० स्कॉट मिशन प्रेस सूरत अंग्रेजी प्रति (एस० एन० १४११५ ) की फोटो - नकलसे । हृदयसे आपका, जब कहा जाये तो भारत सरकारका शिष्टमण्डल सिद्धान्तके सवालपर भारतीयोंका पक्ष तैयार कर सके और सिर्फ उस सिद्धान्तको पुष्टि करनेके लिए उसे जो सबूत दरकार हों वे उसे मिल सकें, इस दृष्टिसे वे लोग शिष्टमण्डलकी सहायता करें। लेकिन, वे तफसीलकी बातोंकी किसी चर्चामें न पड़ें और न उनके बारेमें कोई गवाही ही दें तथा गोलमेज सम्मेलनपर आग्रह रखें। क्या आपको यह सुझाव पसन्द ? कृपया शीघ्र उत्तर दें - सोराबजी सेवाथ होटल । " १. देखिए " पत्र : एस० आर० स्कॉटको ", १६-२-१९२६ । २ और ३. देखिए " एक प्रतिवाद ", ४-३-१९२६ । Gandhi Heritage Portal