वरदाचारीने मुझसे कहा तो था कि मैं आपसे कपाससे सम्बन्धित अध्याय लिखनेके लिए कहूँ; लेकिन मैंने उससे कहा कि वह आपको परेशान न करें। मैं जानता था कि आप बहुत ज्यादा व्यस्त होंगे ।
सभीको सप्रेम ।
अंग्रेजी पत्र ( जी० एन० १५६२ ) की फोटो - नकलसे ।
५६०. पत्र : घनश्यामदास बिड़लाको
भाई घनश्यामदासजी,
आपका पत्र मीला है । आप कहते हैं ऐसे आश्रम खोलनेका यह समय नहि है । वायु बहोत गंदा है। कार्य करनेवाले न तेजस्वी हैं न चारित्रवान् ।
मूल पत्र (सी० डब्ल्यू ० ६१३७ ) से ।
सौजन्य : घनश्यामदास बिड़ला
५६१. पत्र : चिमनलाल गुलाबचंद वोराको
भाई चिमनलालजी,
आपका पत्र मीला है । षड्दर्शन समुच्चय ग्रंथ बोध, वेदांत इ० का निरीक्षण है । असल संस्कृत है । उसका अनुवाद गुजरातीमें प्रगट हुआ है। गुजराती पुस्तक बेचनेवालोंसे मीलना संभवित है । ग्रंथ कठिन है । उसमें केवल बुद्धिका प्रयोग है ।
श्रीयुत चिमनलाल गुलाबचंद वोरा
श्रीमाली मोहल्ला
रतलाम
मूल पत्र ( जी० एन० ६३०१ ) की फोटो नकलसे ।
१. मूलमें पता अंग्रेजीमें दिया गया है ।