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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 31.pdf/५७७

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पत्र : चिमनलाल गुलाबचंद वोराको

⁠वरदाचारीने मुझसे कहा तो था कि मैं आपसे कपाससे सम्बन्धित अध्याय लिखनेके लिए कहूँ; लेकिन मैंने उससे कहा कि वह आपको परेशान न करें। मैं जानता था कि आप बहुत ज्यादा व्यस्त होंगे ।

सभीको सप्रेम ।

आपका,
 
बापू
 

⁠अंग्रेजी पत्र ( जी० एन० १५६२ ) की फोटो - नकलसे ।

५६०. पत्र : घनश्यामदास बिड़लाको


आश्विन सुदी १५, १९८२ [ २१ अक्तूबर, १९२६ ]
 

भाई घनश्यामदासजी,

⁠आपका पत्र मीला है । आप कहते हैं ऐसे आश्रम खोलनेका यह समय नहि है । वायु बहोत गंदा है। कार्य करनेवाले न तेजस्वी हैं न चारित्रवान् ।

आपका,
 
मोहनदास गांधी
 

⁠मूल पत्र (सी० डब्ल्यू ० ६१३७ ) से ।

⁠सौजन्य : घनश्यामदास बिड़ला

५६१. पत्र : चिमनलाल गुलाबचंद वोराको


आश्विन सुदी १५, १९८२ [२१, अक्तूबर १९२६ ]
 

भाई चिमनलालजी,

⁠आपका पत्र मीला है । षड्दर्शन समुच्चय ग्रंथ बोध, वेदांत इ० का निरीक्षण है । असल संस्कृत है । उसका अनुवाद गुजरातीमें प्रगट हुआ है। गुजराती पुस्तक बेचनेवालोंसे मीलना संभवित है । ग्रंथ कठिन है । उसमें केवल बुद्धिका प्रयोग है ।

आपका,
 
मोहनदास गांधी
 

श्रीयुत चिमनलाल गुलाबचंद वोरा

श्रीमाली मोहल्ला

रतलाम

⁠मूल पत्र ( जी० एन० ६३०१ ) की फोटो नकलसे ।

⁠१. मूलमें पता अंग्रेजीमें दिया गया है ।