५६६. पत्र : रॉबर्ट शैमल्डको आश्रम साबरमती प्रिय शैमल्ड, २४ अक्तूबर, १९२६ आपका अप्रत्याशित पत्र पाकर अच्छा लगा । आपने मुझे ३० वर्ष पहलेके सुखद संसर्गकी याद दिला दी है। मुझे आपका और श्रीमती शैमल्डका चेहरा अच्छी तरह याद है । मुझे आपको अपने यहाँके जीवनके बारेमें कुछ बतानेकी कोई जरूरत नहीं, क्योंकि वह तो एक खुली किताब ही है । मैंने आपके युद्ध सम्बन्धी घोषणापत्रको पढ़ा । ऐसा घोषणापत्र आप ही लिख सकते थे । कृपया श्रीमती शैमल्डको मेरा नमस्कार कहिए । श्री रॉबर्ट शैमल्ड ३०८, द एथरटन २११२ एफ० स्ट्रीट, एन० डब्ल्यू ० वाशिंगटन, डी० सी० अंग्रेजी प्रति (एस० एन० १०८३२) की फोटो - नकलसे । हृदयसे आपका, ५६७. पत्र : फैलिक्स वेलोको आश्रम साबरमती प्रिय मित्र, २४ अक्तूबर, १९२६ आपका पत्र मिला। मैं आपकी मासिक पत्रिकाके लिए कुछ लिखना पसन्द तो करता, लेकिन इस समय मेरे पास इतना ज्यादा काम है कि मैंने कुछ समयके लिए १. १४ सितम्बरके अपने पत्र में शैमल्डने लिखा था : आप प्रिटोरिया में हमारे अत्यन्त साधारणसे मिशनमें बहुत आया करते थे। हालांकि इस बातको ३० वर्ष हो गये हैं, उन सुखद दिनोंकी याद हमारे मनमें अभी भी ताजी बनी हुई है ( एस० एन० २०८१० ) । २. शैमरडने अपने पत्रके साथ एक याचिका भी भेजी थी, जिसे उन्होंने बोअर युद्ध में और रक्तपात रोकनेको दृष्टिसे १९०० में प्रिटोरियामें प्रकाशित कराया था; लेकिन उसका मिशनरियोंके अलावा दूसरे बहुत लोगोंने समर्थन नहीं किया था। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 31.pdf/५८४
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