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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 31.pdf/५८७

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पत्र : मोहनलाल मंगलदास शाहको ५५१ अपने साथ रखूं तो कदाचित् इस सम्बन्धमें कुछ किया जा सके। लेकिन वह स्वयं इसके लिए तैयार न होगी। मुझे दुःख है कि मैं उसे अपनी इच्छाके अनुसार समय नहीं दे सकता । वेला बहनका रोग पुराना ही है । वे मेरी सलाहसे दूध और फलपर रहती हैं। इससे उनमें कुछ दुर्बलता भले आ गई थी, परन्तु उनका रोग तो हलका हो गया है । चिन्ताका कारण नहीं है । तुम्हारी जरूरत पहली चीज है, इसलिए तुम्हें जरूरत हो तो अवश्य लिखना । गुजराती पत्र (एस० एन० १२१३८) की फोटो - नकलसे । बापूके आशीर्वाद ५७१. पत्र : मोहनलाल मंगलदास शाहको आश्रम २४ अक्तूबर, १९२६ भाईश्री मोहनलाल मंगलदास शाह, आत्मसाक्षात्कारका अर्थ है समस्त जीवोंको अपने समान मानना । जीवनको सार्थक बनानेकी विधि अन्तर्यामी प्रभुसे पूछनी चाहिए। ईश्वरकी प्राप्तिके लिए अपने-आपको भूल जाना चाहिए, फिर चाहे जीवन कल ही टूट जाये । कार्यमात्र रामको अर्पण करनेसे उसका स्मरण प्रतिक्षण सहज ही होता है । मौनव्रत सत्यकी खोजमें साधन रूप है । उसकी विधि यह है कि बोलकर या लिखकर कुछ न कहा जाये और यदि कुछ कहा जाये तो जितनेसे लोक व्यवहार चल जाये उतना ही । मोहनदासके वन्देमातरम् मौन भवन मु० अलीणा ताल्लुका नडियाद गुजराती पत्र (एस० एन० १९९५५) की माइक्रोफिल्मसे । Gandhi Heritage Portal