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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 31.pdf/५८८

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भाईश्री भगवानजी ५७२. पत्र : भगवानजी पुरुषोत्तमको २४ अक्तूबर, १९२६ आपके पत्र मिले । समय मिलनेपर में 'नवजीवन' में अस्पृश्यताके बारेमें लिखूंगा । कुत्तोंके विषयमें में महाजनों-जैसा नहीं बरत सकता। इसीलिए मैंने कुछ परि- स्थितियोंमें निश्चित मर्यादाएँ रखकर कुत्तोंको मारनेकी बात कही। कुत्तोंसे सम्बन्धित पाश्चात्य पद्धतिका अध्ययन करनेमें न मेरी रुचि है, न उसके लिए समय । अहिंसा उतना सीधा विषय नहीं, जितना आप सोचते हैं । यदि कुत्तोंको मारा जा सकता हो, तो पेड़-पौधोंने ही क्या पाप किया है ? इस प्रश्नके भावार्थपर गम्भीरतासे विचार करनेपर पेड़-पौधोंके साथ जो व्यवहार उचित लगे वही कुत्तोंपर लागू करें। अधिक विस्तार से 'नवजीवन' में लिखूंगा । भाईश्री ५ भगवानजी पुरुषोत्तम चरखा, बाबराके रास्ते काठियावाड़ गुजराती पत्र (एस० एन० १९९५६) की माइक्रोफिल्मसे । बापूके आशीर्वाद ५७३. भाषण : मजदूर संघ, अहमदाबादके वार्षिकोत्सवमें' [ २४ अक्तूबर, १९२६ ] साल-भरतक किसी विशेष कारणसे ही बाहर जानेके मेरे नियमका ध्यान रखकर इस सभामें केवल प्रतिनिधि बुलाये गये हैं और सब कार्यकर्त्ताओंकी सार्वजनिक सभा नहीं की गई है। इसलिए हम जिन विषयोंकी चर्चा बड़ी सभामें नहीं कर सकते उनकी चर्चा इस छोटी सभामें कर सकेंगे। मेरा सार्वजनिक संस्थाओंके कार्य- संचालनका अनुभव ३५ वर्षोंका है और मेरा तो यह सामान्य स्वभाव बन गया है कि जितना पैसा मिलता है, मैं उतना खर्च कर देता हूँ, जोड़ता नहीं हूँ । हालांकि खर्च आप जितना चाहें उतना कर सकते हैं किन्तु मेरा मत तो यह है कि यदि आप निश्चय करके एक करोड़ रुपया इकट्ठा कर लें तो अन्य संस्थाओंकी भाँति आपकी संस्थाका भी पतन होने लग जायेगा। इसके विपरीत आप लोग अपने देशके उत्थानके लिए १. यह उत्सव गांधीजीको अध्यक्षतामें आश्रममें हुआ था और गांधीजीने यह भाषण संघके मन्त्री श्री गुलजारीलाल नन्दा द्वारा १९२५ की रिपोर्ट प्रस्तुत करनेके पश्चात् दिया था । Gandhi Heritage Portal