किसानोंके लिए एक नियामत चुंगीमें अवैध वसूली ५६१ एक यात्री अभी हालमें दक्षिण आफ्रिकासे लौटा है। उसने मुझसे पूछा कि चुंगीके महकमे में अवैध रूपसे रुपया ऐंठनेकी जो बुराई है और जो एक नियम जैसी बन गई है, क्या उसको समाप्त करना सम्भव नहीं है । यद्यपि उनके सामानमें चुंगीकी कोई चीज नहीं थी, फिर भी समयपर पीछा छुड़ानेके लिए उनको रिश्वत देनी पड़ी। मैंने उससे पूछा, क्या आप इस मामलेमें काफी समय देंगे और कष्ट सहेंगे एवं जाँच करवायेंगे ।" उसने कहा : " मैं ऐसा नहीं कर पाऊँगा ।" सबकी सहज वृत्ति यही है और यही उस रिश्वतखोरीका कारण है जो चुंगी विभागमें ही नहीं, रेल विभाग में भी चल रही है । यह तो सच है कि यदि लोग अपनी शिकायतें दूर करवाना चाहते हैं तो उन्हें कुछ समयतक असुविधा भी उठानी चाहिए, फिर भी अधिकारियोंका कर्तव्य है कि वे जितना बने इस तरह जबर्दस्ती रुपया ऐंठनेकी इस रूढ़ प्रक्रियाको रोकें, जिसके कारण इन बेचारोंको कष्ट उठाने पड़ते हैं । यदि कुछ लोक-सेवी युवक जबर्दस्ती रुपया वसूली करनेकी इन घटनाओंके स्वयं शिकार बनें और इनकी सूचना उचित अधिकारियोंको दें, तो यह कोई बुरी बात न होगी । ऐसी कुछ घटनाएँ होंगी तो यह बुराई कम हो जायेगी। इसमें सन्देह नहीं कि इस बुराईको दूर करनेका एकमात्र उपाय यही है कि लोग रिश्वत न दें । जबतक ऐसे लोग हैं जो वाजिब चुंगीसे बचना चाहते हैं तबतक ऐसे चुंगी अधिकारी भी रहेंगे जो अपना मेहनताना माँगेंगे । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २८-१०-१९२६ ५८२. किसानों के लिए एक नियामत कुछ मास हुए मद्रासके श्रीयुत रामचन्द्रनने जो कि कृषि शिक्षामें स्नातक हैं, मुझे लिखा है कि आश्रमके लाभके लिए कूप-कोस (वैल लिफ्ट) का उपयोग कीजिए । उन्होंने विश्वासके साथ कहा कि इससे पैसे और मोट आदि खींचनेवाले पशुओंके श्रममें, खासी बचत हो जायेगी । इस ईजादसे में आकर्षित हुआ और मैंने श्री राम- चन्द्रनको लिखा कि अगर आप स्वयं आ सकें और अपने तरीकेको कामयाबीसे जमा जायें तो हम एक कोस खरीद लेंगे। उन्होंने बड़ी तत्परता दिखाई और उसके फल- स्वरूप, एक माससे अधिक हुआ, आश्रममें इस नई विधिसे काम लिया जा रहा है । आश्रममें, जिस किसीको कृषि विद्याका जरा भी ज्ञान है, वह इस विधिसे पूर्णरूपेण सन्तुष्ट है । बात और पक्की करनेके लिए, मैंने उसे एक इंजीनियरको दिखाया । उसने भी यही कहा कि मेरी रायमें यह ईजाद निहायत मुकम्मिल और बहुत ही सूझ-बूझकी है। आविष्कर्त्ताने अपने आविष्कारके बारेमें यह कहा है : ३१-३६ इस देशमें कृषि योग्य भूमिकी ८० फी सैकड़ा भूमि ऐसी है जिसमें आबपाशी नहीं होती है; मुझे यकीन है कि कुओंसे पानी खींचकर आबपाशी की पद्धतिका Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 31.pdf/५९७
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