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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 31.pdf/६०२

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प्रिय मित्र, ५८६. पत्र : वी० एस० श्रीनिवास शास्त्रीको [ साबरमती ] २९ अक्तूबर, १९२६ वजेसे आपके दक्षिण आफ्रिका जानेके निश्चयकी खबर पाकर मुझे बड़ी राहत मिली। एन्ड्रयूजने मुझे तार दिया था कि आपकी बीमारी और उसकी वजहसे शिष्ट- मण्डलमें आपके शामिल न होनेकी अफवाह फैली हुई है। उन्होंने यह भी बताया था कि इस अफवाहने हमारे देशभाइयोंको परेशानीमें डाल दिया है । अब आपके पत्र से रहा-सहा संशय भी दूर हो गया । वजेका तार मिलनेके तुरन्त बाद मैंने एन्ड्रयूज- को तार देकर आश्वस्त कर दिया था । मैं आपसे पूर्णतया सहमत हूँ कि सम्मेलनसे किसी बड़े परिणामकी आशा नहीं की जा सकती। लेकिन मुझे इतनी आशा तो है ही कि इससे भारतीयोंको दम लेनेका मौका मिल जायेगा । आवारा कुत्तोंको मारनेके बारेमें मैंने जो विचार व्यक्त किये थे, उनसे अनेक लोग मुझसे विमुख हो गये हैं । लेकिन यह तो हमेशासे मेरी किस्मत ही रही है । मैं जानता हूँ कि यह तूफान भी पिछले तूफानोंकी तरह शान्त हो जायेगा । मुझे उम्मीद है कि आपका स्वास्थ्य अच्छा होगा और आप दक्षिण आफ्रिकाके कठिन दौरेमें भी इसे सँभाल रख सकेंगे । आपके शिष्टमण्डलमें होनेसे मुझे और एन्ड्रयूजको बहुत आशाएँ हैं। पता नहीं क्यों शिष्टमण्डलमें आपके सम्मिलित किये जानेकी बातसे में मनमें निश्चिन्त हो गया हूँ । अंग्रेजी पत्र (एस० एन० १२०२८) की फोटो नकलसे । हृदयसे आपका, मो० क० गांधी Gandhi Heritage Portal