५७८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय वर्गीय क्षेत्र विधेयकको प्रस्तुत करनेका विचार सदाके लिए भले ही छोड़ दिया जाये, किन्तु उसके पीछे जो भावना है यदि वह भावना कायम रहे तो प्रवासियों- की स्थिति उससे अधिक अच्छी किसी भी तरह नहीं होगी जैसा विधेयकके पास होनेपर होती । थोथी जीत सचमुचकी हारसे ज्यादा बुरी होगी । इसका कारण यह है कि थोथी जीतके शोरगुलमें पीड़ितोंकी कष्टभरी पुकारको सुनकर भी कोई उनसे सहानुभूति प्रकट नहीं करेगा और उन्हें राहत नहीं पहुँचायेगा । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ४-११-१९२६ ५९८. शुद्ध आचरणके लिए आग्रह मेरे पास चुनावके सम्बन्धमें और प्रसंगवशात् कौंसिलोंकी सदस्यताके कांग्रेसी उम्मीदवार बननेके लिए ढेर-ढेर चिट्ठियाँ आ रही हैं। मैं अब उन्हें प्रकट करनेपर बाध्य हो गया हूँ । विधान सभाकी सदस्यताके एक उम्मीदवार महाशय लिखते हैं : जब मैंने इस काममें हाथ डाला तब मुझे इस बातका बिलकुल ही भान न था कि यह मेरे लिए एक नाहक काम है। मेरे कार्यकर्त्ता झूठा प्रचार करते हैं। वे लोग मेरे जिन गुणोंका बखान करते हैं, वे मुझमें नहीं हैं । मेरे प्रतिद्वन्द्वी मुझे उन अवगुणोंकी खान बताते हैं, जो मुझमें कभी नहीं रहे। मैं न्यायपूर्ण और सीधी लड़ाई चाहता हूँ ।. . क्या आप इस उलझनसे बाहर निकलनेका कोई मार्ग बता सकते हैं ? या आप महज यही कहेंगे कि कौंसिलमें जाना ही गलत है और इसलिए मुझे बैठ जाना चाहिए ? . . दूसरे सज्जन लिखते हैं : क्या आप सदाकी भाँति उन चालबाजियोंको जो कांग्रेसके ही नहीं आपके नामपर भी की जा रही हैं, रोक नहीं सकते ?. अब यह प्रमाणित किया जा सकता है कि ये चालबाजियाँको ही जा रही हैं; तब फिर आप मौन कैसे रह सकते हैं? आप चाहें तो मैं प्रमाण भी प्रस्तुत कर सकता हूँ । मेरे प्रान्तको ही ले लीजिए -- जो दल कांग्रेसका समर्थन करनेमें लाभ देख रहे हैं ( मैं और कोई शब्द प्रयोग करनेमें असमर्थ हूँ) कांग्रेसको बदनाम करनेमें जुटे हैं। खादी भी साथ-साथ बदनाम हो रही है -- यहाँतक कि दोनों है- १. १९२३ में प्रस्तुत इस विधेयक में ऐसी व्यवस्थाएँ थीं जिनसे शहरी क्षेत्रों में एशियाई लोगोंको अनिवार्य रूपसे अलग बस्तियोंमें रखा जा सकता था। लेकिन अप्रैल १९२४ में दक्षिण आफ्रिकी विधान सभाके एकाएक भंग हो जानेसे विधेयक रद्द हुआ मान लिया गया था । २. कुछ ही पत्र अंशतः दिये जा रहे हैं। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 31.pdf/६१४
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