शुद्ध आचरणके लिए आग्रह ५७९ ही चीजें लोगोंको बहुत अप्रिय लगने लगी हैं। चाहे जहाँसे लोग बटोर लिये जाते हैं, उनके नामसे कांग्रेसकी सदस्यताका चन्दा जमा कर दिया जाता और कांग्रेसकी शर्तको शाब्दिक रूपसे पूरा करनेके लिए उनको लपेटनेके वास्ते खद्दरके अँगोछे दे दिये जाते हैं। आप कमसे कम इस नीचे गिरानेवाली पद्धतिके खिलाफ तो अपनी आवाज उठा हो सकते हैं। क्या ऐसे लोग अथवा इनके प्रतिनिधि हमें स्वराज्य लेने लायक बना सकते हैं ? आप कांग्रेससे अवकाश लें, चाहे न लें हम लोग इतनी आशा तो करते ही हैं कि आप इन हरकतोंके खिलाफ अपनी कलम जरूर उठायेंगे ? तीसरे सज्जन लिखते हैं : - क्या आपको मालूम है कि कांग्रेसके सदस्य बनानेके लिए मेरे प्रान्तमें शर्मनाक हरकतें की जा रही हैं ? एक चारित्र्यभ्रष्ट पुरुषने कुछ बदनाम औरतें इकट्ठी कर ली हैं । कमसे कम एकके बारेमें तो मैं कह ही सकता हूँ और वह उनसे या कहिए, उससे कांग्रेसके सदस्य बनवाने का काम ले रहा है। वह घर-घर जाती है, लोगोंकी बुरीसे-बुरी प्रवृत्तियोंको उभारती है और सदस्य बना लाती है। क्या यह नैतिकतापूर्ण है ? क्या यह विधिसंगत है ? यदि इन तरीकोंसे सदस्य बनाये जायेंगे तो कांग्रेसका क्या मूल्य रहेगा ? क्या आप इस प्रकारकी स्त्रियों द्वारा कांग्रेसके सदस्य बनाये जानेको उचित ठहराने के लिए तैयार हैं? यदि नहीं तो क्या आप इस बातको सरे आम कहेंगे ? एक चौथे सज्जनने समाचारपत्रों में से कतरनें काट कर भेजी हैं जिनसे जाहिर होता है कि उम्मीदवार लोग तथा उनके समर्थक साम्प्रदायिक भावोंको उभारते हैं । वे लिखते हैं : - हिन्दू-मुसलमानोंमें फूट तो है ही - • लेकिन अब तो लोग प्रान्तीयता तथा जातीयता को भी साधन बनाने लगे हैं; यानी वोट देनेवालोंसे यह कहा जाता है कि अपने ही प्रान्त या अपने ही पेशेवालोंको उनकी योग्यता-अयोग्यताका विचार किये बिना, वोट दो । एक पाँचवें सज्जनने कुछ कतरनें भेजी हैं, जिनमें ऐसे भाषण छपे हुए हैं जो मैं यहाँ उद्धृत नहीं कर सकता, क्योंकि वे प्रकाशनके सर्वथा अयोग्य हैं । एक छठवें सज्जन लिखते हैं कि रुपये बाँटनेका यानी रिश्वतका बाजार गर्म है । वे आदमी जिनकी कहीं कोई पूछ न थी, आज लम्बी-लम्बी तनख्वाहें फटकार रहे हैं — सिर्फ इसलिए कि वे सभाओंमें बोल सकते हैं और इसलिए कि वे अपने जिलेमें कुछ प्रभाव रखनेवाले माने जाते हैं। उनकी निजकी कोई राय नहीं है । उनमें से कुछ तो यहाँतक बेशर्म हैं कि कह देते हैं कि हम तो एजेंट हैं और हम किसी भी नीतिका ढोल पीटनेको राजी हैं - उसी प्रकार जिस प्रकार कि वकील रुपयेके Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 31.pdf/६१५
दिखावट