सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 31.pdf/६३२

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

५९६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय करें और हमें पूरा भरोसा है कि आप पूर्ण आश्वस्त रहेंगे कि हम अब भी आपके सर्वाधिक विनम्र तथा कर्त्तव्यपरायण अनुयायी हैं । (डा०) सैयद महमूद (दरबार) गोपालदास ए० देसाई (डा०) सैफुद्दीन किचलू बरजोरजी फरामजी भरूचा लक्ष्मणदास रावजी तेरसी नवरोजी एच० बेलगाँववाला [ अंग्रेजीसे ] बॉम्बे क्रॉनिकल, ६-९-१९२६ चन्दूलाल देसाई श्रीनिवास वी० कौजलगी सैयद अब्दुल्ला बरेलवी जयसुखलाल के० मेहता आर० के० सिधवा सोराब पी० कापड़िया परिशिष्ट ५ भवानीदयालका पत्र ९ सितम्बर, १९२६ पूज्य महात्माजी, सादर नमस्ते। मैं अभी यहीं हूँ। बीमार हो जानेके कारण डेप्यूटेशनके साथ दक्षिण आफ्रिका वापस न जा सका। प्रवासी भवनके लिए आपका आशीर्वाद मिला था। श्रद्धेय राजेन्द्रबाबूके हाथोंसे भवनका उद्घाटन हो जानेके बादसे पाठशाला और पुस्तकालयका काम नियमपूर्वक चल रहा है। मैं ' दक्षिण आफ्रिकामें चौदह वर्ष' नामकी एक पुस्तक लिख रहा हूँ। इसमें मैं अपने समस्त अनुभवोंका सार देना चाहता हूँ । अतएव मैं आपसे निम्नलिखित प्रश्न पूछनेकी धृष्टता करता हूँ : १. जोहानिसबर्गमें जो इंडियन लोकेशन था उसे म्युनिसिपैलिटीको दे देनेके लिए क्या आपने भारतीयोंको सम्मति दी थी ? २. ' इंडियन लोकेशन' छिन जानेके बाद क्या म्युनिसिपैलिटीने दूसरी जगह लोकेशन बसानेका विचार प्रकट किया था और क्या यह सत्य है कि आपने भारतीयोंको नई जगह मंजूर करनेसे मना किया ? यदि हाँ तो इसका कारण ? ३. क्या यह सत्य है कि लोकेशनके सम्बन्धमें म्युनिसिपैलिटीकी ओरसे आपको १६०० पौंड मिले थे ? और क्या भारतीयोंसे भी कुछ मिला था ? ४. जोहानिसबर्ग में जो 'ट्रान्सवाल इंडियन एसोसिएशन' था क्या उसीको मिटा कर 'ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की सृष्टि नहीं हुई ? ५. यदि बलात् अँगुलियोंकी छाप देना अनुचित था तो स्वेच्छासे देनेमें उचित कैसे हो गया? इसमें मुझे बड़ा असमंजस जान पड़ता है। क्या संसारमें और भी Gandhi Heritage Portal