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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/५०७

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१९८. पत्र : मणिबहन पटेलको सोमवार | १९२६ ]' चि० मणि, तुम्हारा पत्र मिला । काका (विट्ठलभाई) की मौजूदगी में शहर में जाना तय किया, यह ठीक ही किया । मनु और मणिलाल धीरजसे ही ठिकाने आयेंगे । वा फिर कह रही थी कि वह रविवारको रवाना होगी । बुधको तो वह पहुँच जायेगी । यह पत्र में रात को सोनेसे पहले लिख रहा हूँ । इसलिए अधिक नहीं लिखूंगा । [ गुजरातीसे ] बापुना पत्रो: मणिबहेन पटेलने बापूके आशीर्वाद १९९. पत्र : लक्ष्मीको आश्रम चि० लक्ष्मी', साबरमती [ १९२६]* इस बार तुम्हारा पत्र देरसे आया कहा जा सकता है। लिखावट सुन्दर बन पड़ी है। एक ही पत्रमें दो तरहकी लिखावट नहीं होनी चाहिए। खेलनेका मन होता है, इसकी कोई चिन्ता नहीं । बालकका मन खेलनेका होता ही है, लेकिन उतना ही काम करनेका भी होना चाहिए। जिन बच्चोंका मन हमेशा खेलनेमें लगा रहता है वे किसी-न-किसी समय अवश्य झूठ बोलते हैं। अब तुम्हें तेरहवाँ साल लगेगा। यह १. साधन-सूत्र के अनुसार । २. विठ्ठलभाई विधानसभाके अध्यक्ष चुने जानेके बाद अपने क्षेत्रमें अर्थात् गुजरात में दौरा करनेके लिए आये थे । ३. हरिलाल गांधीकी पुत्री। ४. आश्रमका एक विद्यार्थी । ५. लक्ष्मीका जन्म १९१४ में हुआ था। पत्रमें उसकी बारहवीं वर्षगाँठकी चर्चासे लगता है कि यह पत्र १९२६ में लिखा गया था। ६. आश्रमके हरिजन अन्तेवासी दूधाभाईकी पुत्रो । Gandhi Heritage Portal