पत्र: मणिबहन पटेलको ५०१ मेरा खयाल है, तुमने जो परिस्थितियाँ बताई हैं, उनको देखते हुए तुम यह तो कदापि नहीं चाहोगी कि मैं किसीको वहाँ शिक्षा पानेके लिए भेजूं । मैं यह पत्र सोदपुरसे लिख रहा हूँ । सोदपुर कलकत्तेका एक उपनगर है । यहाँ सतीशबाबूने अपना खादीका कारखाना बनाया है । यह एक बहुत बड़ा प्रयत्न है । इसपर लगभग ८०,००० रुपये लगे हैं । तुम्हें भेजे गये कार्यक्रमके अनुसार हम कल कोमिल्ला जा रहे हैं। लेकिन आगे के लिए यह ध्यान रखना अच्छा होगा कि जब शंका हो तब पिछले पतेपर पत्र लिखा जाये । एक भाई द्वारा दिये गये साथके कागजमें तुम्हारी दिलचस्पी होगी । सस्नेह, अंग्रेजी पत्र (सी० डब्ल्यू ० ५१९४) से । सौजन्य : मीराबहन चि० मणि, २११. पत्र : मणिबहन पटेलको बापू [ सोदपुर ] सोमवार [३ जनवरी, १९२७] मैंने तुम्हारे पत्रोंकी उम्मीद रखी थी, परन्तु एक भी नहीं मिला । आशा है, तुम्हारा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा होगा। संस्कृतकी पढ़ाई खूब चल रही होगी। मुझे ब्यौरेवार उत्तर लिखना । ६ तारीखतक कोमिल्लामें रहूँगा । ९ तारीखतक काशीमें। काशीका पता --गांधी आश्रम, बनारस छावनी, करना । बापूको पत्र लिखना । मालूम हुआ है कि वे तुम्हारी चिन्ता कर रहे हैं। हम सब मजे में हैं । बापूके आशीर्वाद श्रीमती मणिबहन सत्याग्रह आश्रम वर्धा, बी० एन० रेलवे [ गुजरातीसे ] बापुना पत्रो : मणिबहेन पटेलने १. साधन-सूत्रके अनुसार । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/५२९
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