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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/६०१

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भाषण : सार्वजनिक सभा, सिवानमें ५७३ —— हिम्मत भी नहीं कर सकते, उससे भी जल्दी वह स्थापित होकर रहेगी। भले ही हम न चाहें, एक दिन ईश्वर हमपर यह एकता थोप कर रहेगा। इसीलिए मैंने कहा कि अब यह बात ईश्वरके हाथमें पहुँच गई है। मैंने कहा कि मेरे इस कथनको अहंकारयुक्त कथन माना जा सकता है. - अहंकार इस अर्थ में कि इससे यह ध्वनि निकलती है कि यह एकता स्थापित करना किसी दूसरे मनुष्यके वशकी बात नहीं है, और जैसे कि मुझसे ज्यादा इसके लिए किसी औरने प्रयत्न नहीं किया है। लेकिन उस कथनमें कोई अहंकार है नहीं। भले ही इस दिशामें सैकड़ों अन्य लोगोंने उसी ईमानदारी, प्रेम और उत्साहके साथ काम किया हो जिससे मैंने किया है, लेकिन ऐसा कोई नहीं है जिसने यह काम मुझसे ज्यादा किया हो । और मेरा विश्वास है कि वे सब भी अपनेको मेरे जैसा ही असहाय महसूस कर रहे होंगे । १९२० में मैंने कहा था कि ब्रिटिश साम्राज्य भी, अपनी सैन्यशक्ति, कूटनीति और संगठन-बलके बावजूद हमारी हस्ती नहीं मिटा सकता, न हमें गुलाम बना सकता है और न हिन्दुओं और मुसलमानोंको अलग कर सकता है। लेकिन ऐसा इसलिए था कि मेरे खयालसे उस वक्त हममें ईश्वरका भय था । हम एक दूसरेपर विश्वास करते थे और एक दूसरेकी शक्तिपर भरोसा रखते थे। लेकिन आज में आपको अपना सारा भय, सारी घृणा और सारा अविश्वास हृदयसे निकाल फेंकनेके लिए कैसे राजी कर सकता हूँ ? श्रद्धानन्दजी मुसलमानोंके शत्रु नहीं थे । वह एक सूरमा थे। उनमें अपने विश्वासपर दृढ़ रहने का साहस था। उनसे लड़ने का तरीका उनकी हत्या कर देना नहीं था । अतः आइए, हम हिन्दू और मुसलमान उनके रक्तसे अपने हृदयके पाप धो डालें । और, वह कौन-सी चीज है जिसके लिए हमें लड़ना चाहिए? हम हिन्दू लोग मूर्तिपूजक ही सही । हम गलत रास्तेपर हो सकते हैं। लेकिन जब ईश्वरने मनुष्यको गलतियाँ करनेका अधिकार दिया है, जब हमारे मूर्तिपूजक होनेपर भी ईश्वर हमें जीवित रहने देता है तो मुसलमान लोग भी हमें क्यों नहीं बर्दाश्त कर सकते । और अगर किसी मुसलमानको लगता है कि उसे गायका वध करना ही चाहिए तो कोई हिन्दू उसको ऐसा करनेसे क्यों रोके ? क्यों नहीं वह उस मुसलमानके सामने घुटने टेककर उससे गायको न मारनेकी याचना करे ? लेकिन हम लोग ऐसा कुछ भी नहीं करते। तो फिर यह ठीक है, जो चीज हम आज करने को तैयार नहीं हैं वही चीज करने के लिए ईश्वर एक दिन हिन्दुओं और मुसलमानोंको मजबूर करेगा। यदि आप ईश्वर में आस्था रखते हैं तो में विनती करूँगा कि आप अपने अन्तर में पैठकर वहाँ निवास करनेवाले प्रभुसे प्रार्थना करें कि वह आपको कोई गलत काम करनेसे रोके और आपको सही काम करनेकी प्रेरणा दे । हर शाम और सुबह हम यही प्रार्थना करें। दूसरा कोई रास्ता नहीं है । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २७-१-१९२७ Gandhi Heritage Portal