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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/६०३

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चि० मणि, २५९. पत्र : मणिबहन पटेलको मौनवार [१७ जनवरी १९२७] तुम्हारा पत्र मिल गया । तुम्हारे पत्रमें कुछ भी छिपाने जैसी बात नहीं है, जिसे कोई न पढ़े। फिर भी उसे महादेवके सिवा और किसीने नहीं पढ़ा। मैं जबरन तुम्हारी शादी हरगिज नहीं करूँगा; और बापू भी नहीं करेंगे। मेरी चले तो मैं लड़कियोंको जबरदस्ती कुँआरी रखूं। जबरदस्ती विवाह करनेको तो लड़- कियाँ मुझे मजबूर करती हैं। इसलिए मेरी तरफसे तो तुम्हें अभयदान ही है। तुम्हें न समझनेवाले मुझे तंग करते थे । इसलिए मैंने फिरसे पूछ लिया, वह भी तुम्हारी व्यग्रावस्था देखने के बाद। मैं ऐसी युवा लड़कियोंको जानता जरूर हूँ जो स्वयं जानती नहीं, किन्तु जिनकी चित्तकी व्यग्रताका कारण शादी न करना ही होता है । मैं मानता हूँ कि तुम्हारे लिए यह बात नहीं होगी । परन्तु तुम्हें सावधान करना मेरा धर्म था और यह बताना भी कि एक बार ना कहनेके बाद फिर कभी शादीका विचार नहीं किया जा सकता, ऐसा कुछ नहीं है । हाँ, यदि व्रत लिया हो तो जरूर बात खतम हो जाती है । फिर तो आसमान टूट पड़े तब भी व्रतको तोड़ा नहीं जा सकता। लेकिन जबतक तुमने व्रत नहीं लिया है तबतक मेरे जैसे लोग भी तुम्हें पूछेंगे। दूसरे तो आग्रह भी करेंगे। इसका अर्थ यह नहीं कि मैं चाहता हूँ कि तुम व्रत ले लो। वह तो जब तुमसे व्रतके बिना न रहा जा सके तब अपनी इच्छासे लेना । अब मैं तो तुम्हारे विवाहकी बात नहीं करूँगा । इतना ही नहीं, में औरोंको भी उससे रोकूंगा । परन्तु तुम्हें व्यग्रावस्थासे निकल जाना चाहिए और कौमारावस्थाको हर तरहसे सुशोभित करना चाहिए। ब्रह्मचर्यका तुम्हें धार्मिक अर्थ करना है और उससे धार्मिक फल प्राप्त करने के लिए तुम्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना है, जिसके बारेमें मैंने अभी 'नवजीवन' में छप रही अपनी 'आत्मकथा' में लिखा है। इसलिए तुम्हारी प्रकृति शान्त, प्रफुल्लित, उद्यमी और समभावी हो जानी चाहिए । " मार्गोपदेशिका " बार-बार पढ़कर उसे पचा डालो। 'गीता' के प्रत्येक शब्दको उसके नियमोंके अनुसार समझना । लोढ़ना-पींजना सीख लेने के बारेमें मैंने तार दिया है। मैंने कराची भी तार दिया है। अभीतक नारणदासका जवाब नहीं आया। आये या न आये, मेरे पास ऐसी माँग तो और जगहसे भी आई है। अलग-अलग जगह तुम्हें कताई सिखाने के लिए १. साधन-सूत्र के अनुसार । २. खण्ड ३, अध्याय ७ और ८ । ३. आर० जी० भण्डारकर द्वारा रचित । ४. देखिए " तार : मणिबहन पटेलको", १५-१-१९२७ । Gandhi Heritage Portal