५७६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय भेजते रहने का विचार है । मैंने ५० रु० और सफर-खर्चकी माँग की है। इससे अनुभव भी काफी होगा । बादमें देख लेंगे। वहाँ अभी किसी काममें न लगना । ३० रुपये लेती ही रहो। उनमें से बचें तो भले ही बचें। मैं हिसाब माँगूँगा । चि० मणिबहन पटेल सत्याग्रह आश्रम बापूके आशीर्वाद साबरमती [ गुजरातीसे ] बापुना पत्रो : मणिबहेन पटेलने चि० जमनालाल, २६०. पत्र : जमनालाल बजाजको मौनवार, पौष सुदी १४ [१७ जनवरी, १९२७] तुम्हारा पत्र मिला है। गोंदिया और अमरावतीके भण्डारोंके बारेमें मैंने तुम्हें तार दिया है। मुझे गोंदिया आना होगा तो मैं वहाँ भी आ सकूंगा । ३१ की रातको पटनेसे रवाना होना है। पहलीको बम्बई मेल मुगलसरायमें मिलेगी । उसी दिन जबल- पुर . पहुँचूँगा । इससे दूसरी तारीखको गोंदिया पहुँचना सम्भव है । तीसरी को सबेरे भुसावलवाली गाड़ी तो मिलेगी ही । अब मणिलालके बारेमें। मैंने इसके बारेमें किशोरलालको पत्र लिखा है। वह तुम्हें पढ़ा देने को लिखा है । मेरा तात्कालिक सुझाव यह है कि किसीका नाम लिये बिना गोमती अथवा विजयलक्ष्मी सुशीलासे यह पूछे कि उसका विवाह करनेका विचार है या नहीं। किशोरलालके पत्रसे मालूम होता है कि कोई बहन अभी शादी करने को तैयार हो, ऐसा नहीं लगता। अगर ऐसा ही हो, तो हम उनको कैसे लल- चायें ? अगर कोई तैयार हो भी, तो शायद सुशीला हो, ऐसा किशोरलाल मानते हैं । इसीलिए विवाहके बारेमें उसकी इच्छा जान लेनेके बाद ही आगे बढ़ा जा सकता है। इस बीचमें उस तरफ तो आऊँगा ही । उस समय और ज्यादा सूझ पड़ेगा । यहाँ तेज रफ्तारसे यात्रा हो रही है। . ठीक है । ज्यादा प्रबन्ध हो सकता है। आज हम राजेन्द्रबाबूके गाँवमें हैं । जानकी बहनके मसे फिरसे नरम हैं; तो भी उसे दिखाकर, डाक्टर कहे उस मुताबिक करना उचित लगता है। मैं चाहता हूँ कि डाक्टरको दिखाने में देर न करो । ४ १. गांधीजीने इस पत्रमें अपनी यात्राका जो कार्यक्रम दिया है उससे यह पत्र जनवरी, १९२७ का ठहरता है। पौष सुदी १४ को १६ जनवरी थी किन्तु सोमवार १७ जनवरीको ही था। २, ३, ४. साधन-सूत्रमें इन स्थानोंमें शब्द छूटे हुए हैं। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/६०४
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