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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/६१

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भूल सुधार ३३ हम भवन-निर्माण करें तो ऐसा कि आनेवाली पीढ़ियाँ कृतज्ञताका अनुभव करें। हम पत्थरपर-पत्थर जमाते हुए ध्यान रखें कि ऐसा समय आनेवाला है जब पत्थर इसलिए पवित्र माने जायेंगे कि हमने उन्हें छुआ था और जब लोग कहेंगे, देखो, हमारे पुरखे हमारे लिए कितना क्या कर गये हैं । यदि हम प्रत्येक कार्य उस प्रभुके चरणोंमें समर्पित करें जो राजाओंका भी राजा है और उसे अपने स्वार्थके लिए नहीं, बल्कि अगली पीढ़ियोंका हित सोचकर करें तो हमारा सार्वजनिक जीवन आज जितना शुद्ध है उससे कहीं अधिक शुद्ध हो जायेगा । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ११-११-१९२६ १६. भूल सुधार इस 'भूल सुधार" को छाप सकनेमें मुझे बहुत प्रसन्नता है । जैसा कि मैं पहले कह चुका हूँ, सम्बन्धित टिप्पणियाँ, पहले एक सहयोगीने लिखी थीं और उसके बाद उनमें सुधार दूसरेने किया था । वे जल्दीमें लिखी गईं थीं। यह कहना अनावश्यक है कि दोनों लेखकोंमें से किसीका मंशा इन दोनों संस्थाओंका मुकाबला करनेका नहीं था । उनका उद्देश्य केवल इतना दिखाना था कि खादीके दाम लगातार घट रहे हैं । सतीशबाबूने जो भूल सुधार किया है, उसका स्वागत है। उससे लेखकोंके दिये गये उन तर्कोंका समर्थन होता है जिन्हें उन्होंने प्राप्य आँकड़ोंके आधारपर प्रस्तुत किया था । मैं पाठकोंको प्रतिष्ठानकी सही और बढ़ी हुई बिक्रीका ब्योरा दे सका, इसकी मुझे बहुत खुशी है । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ११-११-१९२६ १. यहाँ नहीं दिया जा रहा है। सतीशचन्द्र दासगुप्त द्वारा २ नवम्बर, १९२६ को भेजे गये इस भूल सुधार वाले पत्रमें आँकड़े देते हुए कहा गया था कि यंग इंडियाके २८-१०-१९२६ के अंक में प्रकाशित “ एक मात्र कुटीर उद्योग के रूपमें चरखा" शीर्षक लेखमें 'खादी प्रतिष्ठान' और ' अभय आश्रम' के बीच जो तुलना की गई है, वह उचित नहीं है। ३२- ३ Gandhi Heritage Portal