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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/६१९

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भाषण : मधुबनी में ५९१ भाषण जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि गोशालाओंकी वर्तमान कार्य-प्रणाली- में भी कई दोष हैं। उन्हें ठीक और सही ढंगसे चलाना चाहिए। इसके संचालकोंको पशुओं की बीमारियोंके सम्बन्धमें पूरा ज्ञान होना चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि गायोंको किस प्रकार रखा जाये और कैसा चारा दिया जाये, गाँवके गरीब ग्राहकोंके लिए दूध कैसे सस्ता किया जाये; वस्तुतः गोशालाके संचालकोंको पशुपालनके पूरे विज्ञानका सम्यक् अध्ययन करना चाहिए और केवल तभी गोशालाओंका उद्देश्य पूरा हो सकता है। 1 आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम एकता कायम करानेके लिए मैं जो भी कुछ कर सकता था, वह मैंने किया है, लेकिन में असफल रहा हूँ । इसी कारण मैंने समाचारपत्र भी पढ़ने बन्द कर दिये हैं। मेरे पास उन्हें पढ़ने का समय भी नहीं है । मेरी हालत मिथिलाके राजा जनक जैसी हो गई है जो उदासीन भावसे अपनी नगरीको जलते हुए देखते रहे थे, क्योंकि इससे पहले उस अग्निकी रोक-थामके लिए वह जो भी कुछ कर सकते थे, कर चुके थे। उसी तरह हिन्दू-मुस्लिम मतभेदों- के प्रति मेरा रवैया उदासीनताका है क्योंकि मैं जानता हूँ कि उसका निराकरण मेरी ताकतसे बाहरकी बात है । मैं नहीं जानता कि हिन्दू-मुस्लिम एकता कब और कैसे हो सकेगी। इस देशके लोग पागल हो गये हैं, वे बिना हिचक एक दूसरेका गला काट रहे हैं। मैं उसमें साझोदार नहीं हो सकता। मेरा धर्म अहिंसाका धर्म है । मेरा अहिंसा में अब भी वैसा ही अडिग विश्वास है जैसा कि पहले था, यद्यपि मेरे मित्रोंने इस बातका प्रयत्न किया है कि में विशेष अवसरोंपर हिंसाको उपयोगिताको स्वीकार कर लूँ । मेरे लिए सभी चीजें वैसी नहीं हैं जैसी वे दिखाई देती हैं और मेरा दृढ़ विश्वास है कि केवल अहिंसा ही ऐसा धर्म है जिसके द्वारा अन्ततोगत्वा विजय प्राप्त हो सकती है । इन्हीं सब कारणोंसे मैंने इस विषयपर चर्चा बिलकुल बन्द कर दी है। लेकिन मेरा विश्वास है कि एक न एक दिन हिन्दू-मुस्लिम एकता अवश्य कायम होगी - यदि मानवीय माध्यम द्वारा नहीं तो वह ईश्वरीय माध्यम द्वारा कायम होगी । 11 खद्दरकी चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि खद्दर कार्यके लिए मुझे थैली भेंट की गई है। लेकिन मधुबनीसे में कहीं ज्यादा धनकी आशा रखता था । मधुबनी एक बड़ा खद्दर केन्द्र है । मैंने देखा है कि बहुत-से स्थानीय गरीब सूत कातने- वाले अपना सूत लेकर चार या पाँच मील पैदल चलकर कार्यकर्त्ताओंसे रुई अथवा पैसा लेने आते हैं। मैं जानता हूँ कि ऐसे लोग हैं जो उनसे भी ज्यादा गरीब हैं। जब मैं चम्पारन में था, मैंने एक स्त्रीको यह शिकायत करते सुना था कि वह गंगामें इस- लिए स्नान नहीं कर सकती और अपने कपड़े नहीं साफ कर सकती क्योंकि उसके पास कोई दूसरा वस्त्र नहीं है। हो सकता है कि यह शिकायत अतिशयोक्तिपूर्ण हो, लेकिन ऐसी दशामें पड़े लोगोंका अभाव नहीं है । इन लोगोंकी गरीबी दूर करनेका Gandhi Heritage Portal