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२६९. भाषण : समस्तीपुरकी सार्वजनिक सभामें २० जनवरी १९२७ महात्माजीने कहा कि मुझे आप लोगोंसे एक बार फिर मिलकर खुशी हो रही है। में समस्तीपुरके लोगोंको भुला नहीं सकता, जो एक बार मुझे विशेष ट्रेनसे बाबू बृज किशोर प्रसाद तथा अन्य लोगोंके साथ लेकर आये थे । इसलिए मैं बड़ी आशासे समस्तीपुर आया हूँ। उन्होंने कहा कि मेरे दौरेका उद्देश्य खादीका सन्देश देना है। मुझे यह देखकर बहुत दुख होता है कि जो लोग मुझसे मिलने आये हैं, उनमें से अधिकांश खद्दर नहीं पहने हैं। में हजारों मंचोंसे बराबर पिछले पाँच बरसोंके दीर्घकालसे खादोके सन्देशका उपदेश देता रहा हूँ, लेकिन लोग अब भी खादी इस्तेमाल करनेसे आनाकानी करते हैं। बिहार में अपनी जरूरत-भरकी खादी तैयार करनेकी सामर्थ्य है, और यदि लोग इस महान गृह उद्योगको सहारा दें तो आपके हजारों बेरोजगार स्त्री-पुरुषों -- रुई धुननेवालों, साफ करनेवालों, कातनेवालों, बुनकरों, रंगरेजों और धुलाई करनेवालों को भोजन-वस्त्र मुहय्या किया जा सकता है। खादीपर आप जो भी पाई खवेंगे वह आपके गरीब देशवासियोंके घरमें जायेगी । इसलिए खादी और केवल खादी ही पहनना आपका धार्मिक कर्त्तव्य है । -- भाषण जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि मिलका बना कपड़ा खरीदकर आप लंकाशायर या अहमदाबादके धनी मिल मालिकों को मदद दे रहे हैं। अनसूयाबहन के जरिये मुझे श्रमिकों की हालत अच्छी तरहसे मालूम है । मुझे पक्की तरहसे पता है कि मिलके बने कपड़ोंपर लोग जो बड़ी रकम खर्च करते हैं, उससे श्रमिकों को कुछ लाभ नहीं होता है । धनी मिल मालिकों को पैसेकी जरूरत नहीं है और उनके लिए भारतसे बाहर भी व्यापारका बड़ा क्षेत्र खुला है, लेकिन आपके गरीब देशवासी एक रूखी रोटीके टुकड़के लिए मर रहे हैं। मैं जानता हूँ कि बिहारके लोग कितने गरीब हैं, क्योंकि चम्पारन में में काफी समय रहा हूँ। क्या आप इन गरीब लोगोंके प्रति दया और सहानुभूति नहीं दिखायेंगे ? आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि खद्दरके कामको आगे बढ़ानेके लिए पैसेकी जरूरत है । देशमें करोड़ों रुपयोंकी स्थायी बचत करानेके लिए शुरू में करोड़ों रुपया लगाने की जरूरत है। मैं आपके दरवाजेपर वही पैसा माँगने आया हूँ । मुझे खेद है कि सभा स्थलपर कोई खद्दरका माल नहीं रखा गया है, यद्यपि मुझे यहाँ आनेपर बताया गया था कि शहरमें खद्दरकी दुकानें हैं और सभा स्थलपर कुछ खद्दरका माल अवश्य रखा जायेगा । अस्तु में आप लोगोंसे अनुरोध करता हूँ कि आप तुरन्त खद्दरको दुकानपर जायें और खादी पहनें। ३२-३८ Gandhi Heritage Portal