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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/६२२

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

भाषण समाप्त करते हुए महात्माजीने कुछ शब्द अस्पृश्यताकी बुराईपर कहे, और शहीद श्रद्धानन्दजीको भाव-भीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अछूतोद्धार करनेके प्रयत्न में मृत्युका आलिंगन किया था ।

इसके बाद नगरपालिकाके अध्यक्ष बाबू गिरिवरधरने नगरपालिकाकी ओरसे एक अभिनन्दनपत्र पढ़ा जिसका महात्माजीने संक्षेपमें उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे इस बातसे बड़ा सन्तोष है कि समस्तीपुरके हिन्दू-मुसलमानों में आपसी द्वेष बिलकुल नहीं है। यह बड़ी भारी बात है। मैं आशा करता हूँ कि यह स्थिति बराबर बनी रहेगी ।

समस्तीपुर में एक खद्दर उत्पादन केन्द्र होनेकी इच्छाका उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि आप लोग सचमुच ऐसी संस्था यहाँ चाहते हैं तो राजेन्द्रबाबू अवश्य ही इस मामले पर विचार करेंगे। मैं आशा करता हूँ कि यदि यहाँके लोगोंने उक्त संस्थाके लिए जरूरी पैसा स्वयं जुटा दिया तो राजेन्द्रबाबू निश्चय ही अपनी पूरी शक्तिसे आपकी मददको आगे आयेंगे ।

राष्ट्रीय शालाका उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि खदकी बात है कि वह जैसी होनी चाहिए, नहीं है। मैंने वहाँ कुछ चरखे देखे और कुछ विद्यार्थी भी उनके पास बैठे दिखाई दिये, लेकिन यह सब मखौल-जैसा था; केवल एक दिखावा था । शिक्षक और विद्यार्थी, दोनों ही कताईके बारे में कुछ नहीं जानते हैं। मैंने प्रधानाध्यापक- को उचित निर्देश दिया है और वह उस योजनाके अनुसार काम करनेको राजी हो गये हैं। मैं आशा करता हूँ कि एक महीने के अन्दर मुझे शालाके बारेमें सन्तोषजनक सूचना भेजी जायेगी ।

आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि नगरपालिकाएँ चाहें तो बहुत-कुछ काम कर सकती हैं। वे न केवल खद्दर कार्यके लाभके लिए वरन् स्वयं अपने लाभके लिए खद्दर कार्यकी काफी प्रगति कर सकती हैं।

इसके बाद उन्हें २००० रुपयेकी एक थैली भेंट की गई जिसपर उन्होंने कहा कि समस्तीपुरको इतना कम चन्दा नहीं देना चाहिए। साँचा:Lef