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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/६३४

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महोदय, परिशिष्ट ३ केनियाके भारतीय : डी० बी० देसाईका पत्र भड़ौच १२ दिसम्बर, १९२६ मेरे खयालमें अबतक आप जान गये होंगे कि केनिया (ब्रिटिश पूर्व आफ्रिका) की सरकारने हरेक भारतीयपर गैर-वतनी व्यक्ति करके रूपमें एक पौंडका अतिरिक्त कर लगानेका फैसला किया है। भारतीय नागरिक संघने मुझे अब निम्निलिखित तार भेजा है : " एक पौंडका अतिरिक्त व्यक्ति कर केवल एशियाइयोंके लिए है। समाचारपत्रों, सभाओं द्वारा विरोध कीजिए और कांग्रेस तथा सरकारसे विरोध करनेको कहिए । इस तारसे ऐसा लगता है कि स्थिति और खराब हो गई है और वे लोग भारतकी जनताकी तथा भारत सरकारकी भी सहायता चाहते हैं । और मुझे कोई शक नहीं है कि ये दोनों ही इस मामलेमें केनियाके भारतीयोंको खुशीसे सहायता देंगे । मेरे खयालमें यदि मैं आपको इस गैर-वतनी व्यक्ति करका कुछ इतिहास बता दूं तो वह उपयोगी होगा । गैर-वतनी व्यक्ति कर संग्रह करनेका अध्यादेश ब्रिटिश पूर्वी आफ्रिकी सरकारने १९१२ में पास किया था, जिसमें १ जनवरी, १९१३ से हरेक गैर- वतनी वयस्क पुरुषसे सालाना १५ रुपये लेनेकी बात थी । उस समय अर्थात् १९१२ में केनिया विधान परिषदमें कोई भारतीय प्रतिनिधि -- नामांकित या निर्वाचित - नहीं था, इसलिए 'प्रतिनिधित्वके बिना कर नहीं' के प्रसिद्ध सिद्धान्तके अनुसार भारतीयोंके विरुद्ध लगाया गया १५ रु० का यह गैर-वतनी व्यक्ति कर बुरा था और अनुचित भी । - फिर, १९२० तक केनिया (उस समय ब्रिटिश पूर्व आफ्रिका) में भारतीय रुपया चालू और वैध सिक्का था, और १९१२ से लेकर मुद्राके परिवर्तनके दिनतक एक रुपया एक शिलिंग और चार पैंसके बराबर था, इसलिए भारतीयोंको हर साल १५ रुपये देने पड़ते थे जो २० शिलिंगके बराबर थे । बादमें रुपयेके स्थानपर फ्लोरिन मुद्रा आ गई और एक फ्लोरिन एक रुपयेके बराबर हो गया (अर्थात् दूसरे शब्दोंमें ब्रिटिश पूर्व आफ्रिकाके स्थानीय कानूनों और अध्यादेशोंमें जहाँ 'रुपये' लिखा रहता था वहाँ उसके स्थानपर 'फ्लोरिन' का प्रयोग होने लगा ।) मुद्राके इस परिवर्तनसे गैर-वतनी व्यक्ति-करके लिए १५ फ्लोरिन लिये जाने लगे । १९२२ में ब्रिटिश पूर्व आफ्रिका (केनिया) में मुद्रामें एक और परिवर्तन किया गया जिससे फ्लोरिनके स्थानपर शिलिंग मुद्राकी शुरुआत की गई और दो शिलिंग एक फ्लोरिनके बराबर माने गये । इस प्रकार मुद्राके दूसरी बारके परिवर्तनके कारण इस करके लिए ३० शिलिंग लिये गये और इस प्रकार इस करको कर दाताओंके बिना किसी दोषके २० शिलिंगके बजाय ३० शिलिंग Gandhi Heritage Heritage Portal