६०८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय है । मैं मानता हूँ कि यहाँ आपको यह बताना भी फिजूल नहीं होगा कि स्कूल जानेवाले बच्चे प्रति मास जिन-जिन कक्षाओंमें वे पढ़ते हैं उसके मुताबिक क्रमशः २ शिलिंग, ४ शिलिंग और ८ शिलिंग फीस देते हैं, जिसका मतलब यह भी हुआ कि भारतीय बालक अपने यूरोपीय भाई बहनोंकी बनिस्बत कहीं ज्यादा धन दे रहे हैं, और इस तथ्यपर केनियाकी सरकार ध्यान देना भूल गई । बहुसंख्यक रिपोर्ट में (जिसपर कमेटी के सदस्य होनेके नाते केनिया सरकारके औप- निवेशिक सचिव के हस्ताक्षर होते हैं), जो केनिया सरकारको पेश की जाती है (और जिस रिपोर्टकी गर्वनर महोदयने बड़ी प्रशंसा की है) और जिसे केनिया विधान परिषदको पास करना है, यह राशि प्राप्त करनेका निम्न ढंग बताया गया है । मद्यसार (स्पिरिट) २५,०० पौंड, अंगूरी शराब (वाइन) ७,००० पौंड, शैम्पेन ५०० पौंड; घरेलू नौकर (पुरुष) ७,००० पौंड (केवल यूरोपीयोंसे) तथा एशियाई व्यक्ति-कर १२,००० पौंड | उक्त रिपोर्ट में ऐसा कहा गया है और माना गया है कि पहले तीन मुद्दोंसे जो ३२,५०० पौंड प्राप्त होने हैं उनमें २४,५०० पौंड तो यूरोपीय देंगे और शेष भारतीय । लेकिन क्योंकि केनिया सरकार अनुपात दिखानेके लिए कोई हिसाब-किताब नहीं रखती, इसलिए किसी पूर्वानुमानपर पहुँचना बुद्धिमत्ता नहीं होगी। इस ३२,५०० पौंडके अलावा नये करमें १९,००० पौंड शेष रह जाते हैं जिनका विभाजन यूरोपीयों और भारतीयोंमें करना है; यूरोपीय ७,००० पौंड देंगे और भारतीय १२,००० पौंड । ऊपरके अनुच्छेदमें जिस घरेलू नौकर-करका उल्लेख किया गया है उसकी अदाय- यगी 'प्रति घर दो नौकरोंसे अधिक होनेपर और प्रत्येक घरेलू नौकर ( पुरुष ) की उम्र स्पष्ट रूपसे १६ वर्षसे अधिक होनेपर दो शिलिंग प्रति नौकर प्रतिमाह होगी '; जिसका तात्पर्य यह हुआ कि ऐसे बहुतसे परिवार मिल जायेंगे जिनपर इस करका, जो कि व्यक्तिगत कर नहीं है, बोझ नहीं पड़ेगा। इसके विपरीत, अतिरिक्त एशियाई व्यक्ति-करके सम्बन्धमें प्रत्येक वयस्क एशियाई पुरुषको २० शिलिंग फालतू देने होंगे । यहाँ भी खुले रूपसे अन्याय हुआ है । 6 एक सदस्यने, जिसने इस बहुसंख्यक रिपोर्टपर हस्ताक्षर किये हैं, केनिया विधान परिषदमें वाद-विवादके दौरान यह कहा : व्यक्ति कर के विषयमें यह बात है कि यह खास तौरपर भारतीयोंकी जरूरतोंको पूरा करनेके लिए लगाया गया था, क्योंकि ऐसा महसूस किया गया था कि भारतीय लोग देशमें यूरोपीयोंके विपरीत विलास वस्तुओं पर रुपया खर्च नहीं करते हैं, बल्कि उस रुपयेको देशसे बाहर भेज देते हैं ।" उपर्युक्त वक्तव्य से कोई भी व्यक्ति सहज ही यह जान जाता है कि इस नये करको लगाने में पूर्वग्रहोंका कितना बड़ा हाथ है। मेरे ख्यालमें एक पौंडके अतिरिक्त नये करके पीछे केनिया सरकारकी मंशा, जिसके शासनको बागडोर केनियाके गोरे निवासियोंके हाथमें है, केनियाके कानून-परायण भारतीय नागरिकोंको परेशान करना है । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 32.pdf/६३६
दिखावट