क्या भारत मद्यनिषेधवादी है ? १४९ उन स्थानीय प्रशासनिक संस्थाओं, जमींदारों, देशी रियासतों, सहकारी समितियोंको जो अपने अधिकार क्षेत्रमें बड़े पैमानेपर कोस शुरू करना चाहती हैं, एक साथ ही ५० या अधिक कोसोंके क्रयके लिए उनके प्रार्थनापत्र भेजनेपर विशेष [ रियायती ] मूल्य सूचित किया जायेगा। कोसके बंडल एक साथ बाँधने और रेलसे भेजनेके किराये वगैरहमें होनेवाली बचतके अनुसार उनके दामोंमें और भी कमी की जा सकेगी। कोस मँगाते समय ग्राहक कृपया कुएँकी तहसे लेकर कुऍकी जगत तककी पूरी गहराई लिख भेजें और यह भी बतलायें कि बाल्टी कितनी बड़ी चाहिए। सभी माँगोंके साथ आधी रकम नकद पेशगी आनी चाहिए। बाकी रकमके लिए सामान वी० पी० से भेजा जायेगा । पेशगी रुपया प्राप्त हो जानेके कोई एक महीने बाद माँगोंके क्रमानुसार कोस भेजा जायेगा । आश्रमने अपने लिए कोई नफा नहीं रखा है। केवल लागत दर और माल पहुँचानेका खर्च लिया जाता है । आश्रममें जो कोस अबतक चल रहा है, उससे पूरा- पूरा सन्तोष मिला है और आश्रमके सामने अब यह सवाल है कि [ आश्रमके ] गैरजरूरी बैलोंका क्या उपयोग किया जाये। एक सचित्र सूची पूरे ब्यौरेके साथ छाप ली गई है। जो सज्जन यह सूची लेना चाहें, आश्रमके व्यवस्थापकको एक आनेका डाक टिकट भेजकर मँगा सकते हैं। जिन लोगोंने इस कोसके बारेमें श्रीयुत रामचन्द्र अय्यरसे या मुझसे पत्र-व्यवहार किया था वे सब लोग ऊपर लिखी शर्तोंपर अपने लिए कोस अब मँगा सकते हैं । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ३-३-१९२७ १३६. क्या भारत मद्यनिषेधवादी है ? एक अंग्रेज बहन, जो हिन्दुस्तानमें मद्यनिषेध प्रचारका काम हाथ में लेनेको उत्सुक हैं, लिखती हैं : " मैं जानती हूँ कि सब लोग मुझसे यही कहेंगे कि खुद हिन्दुस्तानियोंने मद्यनिषेधके लिए कोई जबरदस्त ख्वाहिश जाहिर नहीं की है और चूंकि उन्होंने इसके लिए कोई आन्दोलन संगठित नहीं किया है, इसलिए हम लोगोंका इस मामले में पहल करना अनुचित हस्तक्षेप करना होगा और फिर सारी कौंसिलोंमें से भी केवल एक या दो ने ही मद्यनिषेधके पक्षमें अपनेको घोषित किया है। लोग अभीसे ही मुझसे ये बातें कह रहे हैं। में बराबर ही उन्हें असहयोग आन्दोलनकी याद दिलाती हूँ, जब स्वयंसेवकोंने शराबकी दुकानोंपर धरना दिया था । १. कुमारी म्मूरियल लेस्टर; देखिए " पत्र : म्यूरिल लेस्टरको”, १७-३-१९२७ । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/१८७
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