१५० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय मगर जब वे कहते हैं कि वह तो पाँच साल पहलेकी बात है, उसके बाद तो उन्होंने कोई खास उत्साह नहीं दिखलाया है तो इसका क्या जवाब दिया जाये ? यह बहन मुझसे जो समस्या हल कराना चाहती हैं, वह कोई नई समस्या नहीं है । जो व्यक्ति हिन्दुस्तानमें पूर्ण मद्यनिषेधके आन्दोलनका इतिहास नहीं जानता, उसके मनमें यह सवाल उठेगा ही । और हमारे यहाँ आनेवाले परदेशीके मनमें यह प्रश्न उठे बिना नहीं रह सकता कि " अगर हिन्दुस्तान पूर्ण मद्यनिषेध चाहता है तो फिर जैसे वह और कितनी ही चीजोंके लिए आन्दोलन करता है, वैसे मद्यनिषेधके लिए क्यों नहीं करता ? " यह देखने में आया है कि जब लोग अपनेको नितान्त बेबस महसूस करते हैं तब आन्दोलनमें नहीं पड़ते। यह हमारी बेबसी ही है जो हम कोई आन्दोलन नहीं करते, सिवाय इसके कि कुछ मद्यनिषेव सभाएँ प्रस्ताव पास कर देती हैं और कभी-कभी विधानसभाओं में हम प्रार्थनापत्र भेज देते हैं। अपने कल्याणके अत्यन्त महत्त्वके विषयोंमें हमारी बढ़ती हुई वेवसीके एहसासके फलस्वरूप ही स्वराज्यकी पुकार शुरू हुई थी। सैनिक खर्चको लीजिए। सभी महसूस करते हैं कि यह उस धनका, जिसकी वसूली भूखे रहनेवाले करोड़ों लोगोंसे की जाती है, घोर अपराधयुक्त अपव्यय है । हम लोग सैनिक खर्चमें कमी करानेके बजाय स्वराज्यके लिए आन्दोलन करते हैं, क्योंकि स्वराज्यके बिना कुछ हो ही नहीं सकता। कौन कह सकता है कि इस तर्क में बहुत कुछ सच्चाई नहीं है ? १९२० में जब हमने अनुभव किया कि हमें स्वराज्य मिलने ही वाला है, हम कानूनके विधाता वन बैठे; शराबकी दुकानों और भट्ठियोंपर हमने सफलतापूर्वक धरना दिया और सरकार अपनी आबकारी आमदनी तत्काल कम होते देखकर डर गई । मदिरा-विक्रेताओंके दिल काँप उठे और हमें एक क्षणके लिए ऐसा मालूम हुआ कि शराबकी कुप्रथा समाप्त हो गई है। दुर्भाग्यसे अहिंसावादी दल पूरी तौरसे जनताको काबू में नहीं रख पाया और हिंसा फूट पड़ी। यह पता चला कि धरना देनेवाले लोगोंने हिंसाकी धमकी या हिसाका सहारा लिए बिना शराबबन्दी रोकनेसे सम्बन्धित हिदायतोंका हर जगह पालन नहीं किया था । इसलिए धरना रोक देना पड़ा। पर १९२०-२१ का इतिहास स्पष्ट रूपसे यह प्रकट करता है कि अगर हिन्दुस्तानके पास ताकत होती, तो वह क्या करता या जब उसने अपनेको ताकतवर समझा, तब उसने क्या किया। इसके अलावा यह भी याद रखना चाहिए कि हिन्दुस्तानके करोड़ों निवासी अपने मजहबके कारण या आदतन मादक द्रव्योंसे पूरा परहेज करते हैं। इसलिए ये करोड़ों लोग शरावका परम हानिकर व्यापार चालू रखने में दिल- चस्पी नहीं रख सकते । इसलिए यह जो कहा जाता है कि हिन्दुस्तानमें पूर्ण मद्य- निषेधके लिए कोई आन्दोलन नहीं है, उसके बारेमें यह जवाब दिया जा सकता है कि आन्दोलनके अभावका कारण यह नहीं है कि लोगों में पूर्ण मद्यनिषेध कराने की इच्छाका अभाव है, बल्कि इसका कारण यह है कि वे जानते हैं कि वे असहाय हैं । दूसरा कारण यह है कि वे पूरी तरहसे जानते हैं कि यह आन्दोलन स्वराज्य प्राप्तिके बड़े आन्दोलनका एक अंग है। Gandhi Heritage Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/१८८
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