क्या भारत मद्यनिषेधवादी है ? १५१ खुद यही बात कि किसी अंग्रेजको शराबकी चुंगीसे होनेवाली आमदनीका इस- लिए समर्थन करना पड़े कि हमारे बीच उसकी पूर्ण बन्दीका कोई आन्दोलन नहीं है, स्वराज्य प्राप्तिकी अनिवार्यताके पक्ष में एक बहुत जबर्दस्त दलील बन जाती है । क्योंकि जिन क्षेत्रोंमें यह धारणा ईमानदारीके साथ बनाई गई है कि यहाँ मद्यनिषेधका आन्दोलन नहीं है तो उससे केवल यही प्रकट होता है कि उन क्षेत्रोंके लोगोंको भारतकी मौजूदा परिस्थितियोंका जरा भी ज्ञान नहीं है। मलेरिया ज्वर या बीसों दूसरी बीमारियोंके विरुद्ध भी तो जनताकी ओरसे कोई आन्दोलन नहीं किया जा रहा है। तो क्या यह बात इन बीमारियोंको समूल नष्ट करनेके उपाय न करने की कोई दलील हो सकती है? एक जानी-मानी बुराईको दूर करनेके लिए तुरन्त उपाय करनेके लिए किसी आन्दोलनकी जरूरत नहीं होनी चाहिए। कई दृष्टियोंसे तो शराब और विषैली दवाइयोंकी हानिकर पद्धति मलेरिया या उस जैसी दूसरी बीमारियोंसे कहीं ज्यादा बुरी है; क्योंकि मलेरियासे तो केवल शरीरको ही हानि पहुँचती है परन्तु शराब वगैरह तो शरीर तथा आत्मा दोनोंको खोखला कर डालती है। शरावसे आमदनी करना, सैनिक खर्च लादना और अपने लंकाशायरके कपड़ोंके जरिये भारतको शोषित करना इन्हीं तीन तरीकोंसे ब्रिटिश शासनने भारतपर ज्यादती की है। जब अंग्रेज लोगोंके दिलमें यह बात बैठ जायेगी कि गरीब हिन्दुस्तानी मजदूरोंकी शराबकी आदतपर तिजारत करना पाप है, हिन्दुस्तान की धरतीपर इंग्लैंड या अन्य विदेशोंके कपड़ेको पाटना गुनाह है जबकि यहाँके भूखों मरनेवाले लाखों आदमी सहज ही अपनी जरूरतका काफी कपड़ा अपने खाली वक्त में बना सकते हैं, और जब उनको यह बात सूझ जायेगी कि हिन्दुस्तानके ऊपर इतना लम्बा-चौड़ा सैनिक खर्च लादना, जो जाहिरा तौरपर तो हिन्दुस्तान की सीमाओंकी रक्षाके लिए बताया जाता है परन्तु वास्तवमें जो भारतीयोंको उनकी इच्छा के विरुद्ध गुलाम बनाये रखनेके लिए हैं, तब उनके हृदय परिवर्तनका पूरा-पूरा सबूत मिल जायेगा और पूरी बराबरीके दर्जेपर भारतीयोंका अंग्रेजों के साथ पारस्परिक सहयोगका होना सचमुच में सम्भव हो जायेगा । इसलिए एकमात्र आन्दोलन जिसे हिन्दुस्तान कर सकता है वह है उस शासन प्रणालीका ही अन्त करना, जो ऐसी बुराइयोंको होने और चलने देती है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि स्वराज्यका आन्दोलन ही इन सभी बुराइयोंको दूर करनेका आन्दोलन है । मेरे खयाल से इन बुराइयोंके दूर करनेका काम अंग्रेजोंके लिए उनकी भारतके प्रति नेकनीयती साबित करनेकी खरी कसौटी है । [अंग्रेजीसे] यंग इंडिया, ३-३-१९२७ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/१८९
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