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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/१९५

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पत्र: सतीशचन्द्र दासगुप्तको

ब्रह्मचर्यंका पालन जितना मुश्किल मालूम होता है, उतना ही सहज है। ब्रह्मचर्यं आत्माका सहज गुण है और आपकी आत्माएँ मरी नहीं हैं, बल्कि सुषुप्त हैं। उन्हें जगा-भर लेना है। उन्हें जगाना इसलिए कठिन मालूम होता है कि हम नास्तिक हो गये हैं। आपके मनमें ज्यों ही श्रद्धा आयेगी, यह बिलकुल सहज बन जायेगा, क्योंकि परमात्माकी कृपा श्रद्धासे ही मिलती है। तब ब्रह्मचर्य पालन प्रयत्न-साध्य एवं कष्ट साध्य नहीं रह जाता बल्कि उससे शान्ति एवं आनन्दकी प्राप्ति होती है। यह सब कुछ इसलिए कह रहा हूँ कि मुझे इसके आनन्दका अनुभव हो चुका है।

[अंग्रेजीसे]
यंग इंडिया, २४-३-१९२७

१४३. पत्र: सतीशचन्द्र दासगुप्तको

रविवार [६ मार्च, १९२७][]

प्रिय सतीश बाबू,

किशोरलाल मशरूवालाकी भतीजीसे मणिलालका विवाह सम्पन्न करने में एक दिनके लिए अकोला आया हूँ। मैं आज रातको आश्रमके लिए रवाना हो जाऊँगा। आशा है आपका स्वास्थ्य बराबर सुधर रहा होगा।

आपने जो ५०,००० रुपये मांगे हैं उसमें से जितने भेजे जा सकते हैं, भेजनेका प्रबन्ध किया जा रहा है। फेरीवालोंको कमीशन देना सम्भव नहीं है। नियमोंके अनुसार कमीशन लोगोंको मात्र निर्वाहके लिए दिया जाता है। पेशेवर फेरीवालोंके लिए इस नियममें यदि हम थोड़ीसी भी ढिलाई करते हैं तो हमारी नाकमें दम हो जायेगा। नियम बनाये ही इस प्रकार गये हैं कि लोगोंको फेरीका धन्धा आजीविकाके रूपमें अपनानेके लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

मुझे आशा है कि अब आप सब लोग खतरेसे बाहर निकल आये होंगे। तारिणीका क्या हाल है?

में ८ से १४ मार्च तक आश्रममें और उसके बाद १५ से १७ तक बारडोली,१९ से २१ तक गुरुकुल काँगड़ी, जिला बिजनौरमें रहूँगा। फिर वहाँसे कर्नाटक जाऊँगा। कर्नाटक में पता बेलगाँवका ही ठीक रहेगा, हालांकि मैं वहाँ इधर-उधर दौरे पर ही रहूँगा।

आप सबको स्नेह,

बापू

अंग्रेजी (जी० एन० १६३१) की फोटो-नकलसे।
  1. मणिलालके विवाहके उल्लेखसे।