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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२०८

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय
में कमीशनके बारेमें पता लगाऊँगा।
आप सबको सस्नेह,

हृदयसे आपका,
बापू

[कार्यक्रम][]
अंग्रेजी (जी० एन० १६३२) की फोटो नकलसे।

१५८. पत्र: मीराबहनको

१५ मार्च, १९२७

चि० मीरा,

तुम्हारे दो पत्र मिले। शायद कल एक और मिले। देखता हूँ कि सेठी भी तुम्हें निराश करता रहा है। पत्र यह सूचित करनेके लिए लिख रहा हूँ कि श्रीमती राय जो पत्र चाहती हैं, सो तुम उन्हें भेज दो। उनका पत्र इसके साथ भेज रहा हूँ । तुम उन्हें जानती हो। वे एक दिनके लिए आश्रम आई थीं। वे सुप्रसिद्ध डा० रायकी पत्नी तथा एक विख्यात संस्कृत विद्वानकी पुत्री हैं। वे स्वयं भी संस्कृतकी विदुषी हैं। बाकी सब तुम्हें उनके पत्रसे पता चल ही जायेगा। सीधे उन्हें ही पत्र लिख देना। यदि चाहो तो जबतक हम मिल नहीं लेते, तबतक रुक भी सकती हो।

बापू

अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू० ५२१०) से।
सौजन्य: मीराबहन

१५९. पत्र: जी० ए० नटेसनको

१५ मार्च, १९२७

प्रिय मित्र,

मद्रास में रहते हुए यात्राके दौरान आपका अतिथि बननेमें मुझे हार्दिक प्रसन्नता होगी। परन्तु मैंने अपने आपको राजगोपालाचारीके हाथों सौंप दिया है। आप उनसे बात करके जो प्रबन्ध करना चाहें, कर सकते हैं।

हृदयसे आपका,
मो० क० गांधी

अंग्रेजी (जी० एन० २२३५) की फोटो नकलसे।
  1. देखिए पिछला शीर्षक।