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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२१६

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१७८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय वह यह कि हम खुद उसके शिकार न बनें अर्थात् उसके साथ असहयोग करें, और शैतान द्वारा फैलाये गये जालमें हमें फँसानेके लिए की जानेवाली उस हर कोशिशके जवाबमें हम जोरसे 'नहीं' कहते रहें । उस आन्दोलनको धक्का जरूर लगा है, लेकिन वह मरा नहीं है । मैंने जो वायदा किया था वह शर्तके साथ किया था। शर्ते मामूली और आसान थीं। मगर उस आन्दोलनके प्रमुख कार्यकर्त्ताओंके लिए वे बहुत ही सख्त साबित हुईं। जिसे कामरेड सकलातवाला, मेरी भूल और असफलता मानते हैं उसे मैं अपनी शक्ति और दृढ़ विश्वासकी अभिव्यक्ति मानता हूँ। हो सकता है कि वह मेरी भूल हो; लेकिन जबतक इसके सच होने में मेरा विश्वास है तबतक मेरी भूल ही मुझे अडिग बनाये रहेगी, जैसे कि अभी बनाये हुए है । बारडोलीमें अपने कदम वापस लेना में बहुत ही बुद्धिमानीका काम और देशकी परम सेवा समझता हूँ । उस फैसलेकी वजहसे सरकारकी ताकत घटी ही है । अगर मैं चौरीचौराके बाद भी उसकी शर्तोंको, जिन्हें वाइसरायके नाम मेरी अन्तिम चेतावनी' माना गया था, पालन करनेपर ही जोर देता रहता तो सरकार फिर अपने खोये हुए मोर्चे वापस हथिया लेती । मेरे 'बन्धु' यह कहनेमें भूल करते हैं कि दक्षिण आफ्रिकाका आन्दोलन असफल रहा। यदि वह असफल रहा है तो निश्चय ही मेरा सारा जीवन असफल ही माना जाना चाहिए। और उनका मुझे अपने दलमें शरीक होनेके लिए आमन्त्रित करना भी बेमतलब की बात समझना चाहिए। मेरे जीवनके मिशनका श्रीगणेश दक्षिण आफ्रिकाने ही कराया था। गत महायुद्धके दिनोंमें अपने तत्कालीन विश्वासोंके अनुसार मैंने अपने आपको तथा अपने साथियोंको घायलोंकी सेवा करनेवालोंकी हैसियतसे जो सरकारके हवाले कर दिया था, अपने उस कामको भी में भूल नहीं मानता । ये प्रख्यात संसद सदस्य महोदय उतावलीमें हैं। ये महाशय तथ्योंका अध्ययन करना हेय समझते हैं। मैं उन्हें बतला दूं कि खादी आन्दोलन उतारपर नहीं है । गत वर्ष १९२० के कामकी अपेक्षा कमसे कम बीस गुना काम जरूर हुआ । आज खादी-कार्यसे १५०० गाँवों में कमसे कम ५० हजार कतैयोंको लाभ हो रहा है और इसके अलावा बुनकरों, रंगरेजों, छीपियों, घोबियों और दर्जियों को भी काम मिल रहा है । श्री सकलातवाला पूछते हैं कि खद्दरका उद्देश्य क्या है। इसका उद्देश्य है सादगी, आडम्बर नहीं । गरीबों के शरीरोंपर यह खूब खिलता है, बड़ेसे-बड़े धनी और कला-प्रेमी स्त्री-पुरुषोंके शरीरोंको सुशोभित करने लायक भी बन सकता है, जैसा कि वह पहले बना ही करता था । खद्दर पुरातन कलाकौशलको पुनरुज्जीवित करता है। यह सभी प्रकारके यन्त्रोंको नष्ट नहीं करना चाहता मगर उनके प्रयोगपर नियन्त्रण और उनकी बेहिसाब बढ़ोतरीकी रोकथाम जरूर चाहता है । यह यन्त्रोंको इस्तेमाल करता है, गरीवसे गरीबको उसीके झोंपड़े में बैठे-बैठे राहत पहुँचानेके लिए। चरखा खुद एक बहुत ही सुन्दर यन्त्र है । १. देखिए खण्ड २२, पृष्ठ ३१७-२० । Gandhi Heritage Portal