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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२२१

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भाषण : हरिद्वारमें १८३ आप अपना आत्मबल खो बैठेंगे और “उदर निमित्तं बहुकृत वेशः "" जैसे बनेंगे तो आपकी सारी शिक्षा निरर्थक होगी । आज मैं आपके सामने चरखे और खादीकी बात करने नहीं आया हूँ । ब्रह्मचर्य, वीरता और क्षमापालन आपका पहला काम है। इसे भूलेंगे तो स्वामीजीका कार्य कायम नहीं रहेगा । रशीदकी गोली स्वामीजीका क्या बिगाड़ सकी? वे तो इस गोलीसे अमर हो गये । स्वामीजीका दूसरा कार्य अछूतोद्धार था । खादीकी वकालत मालवीयजीने जिन शब्दोंमें की थी उस तरह में नहीं कर सकता, पर इतना जरूर कहूँगा कि यदि हमारे मनमें सदा गरीबों और अछूतोंका विचार हो तो आप खादीसे अलग नहीं रह सकते। वीर्यकी रक्षाके लिए कोई अमली काम करना हो तो इसके लिए खादीसे बढ़कर कोई दूसरा काम नहीं है। खादीके कार्यके साथ में स्वामीजीका नाम नहीं जोड़ना चाहता, क्योंकि वह स्वामीजीका प्रधान कार्य नहीं था । पर इतना अवश्य कहूँगा कि आप स्नातक विदेशी वस्त्रोंसे अपने आपको सुशोभित करनेका विचार न करें। गरीबों और अछूतोंकी रक्षाके लिए सिर्फ खादी ही धारण करें। ईश्वर आप सबके ब्रह्मचर्यकी, सत्यकी और प्रतिज्ञाओंकी रक्षा करे, गुरुकुलका कल्याण करे, और स्वामीजीकी प्रत्येक शुभ प्रवृत्तिको चालू रखे । [गुजरातीसे] नवजीवन, २७-३-१९२७ १६९. भाषण : हरिद्वारमें १९ मार्च, १९२७ यदि मैं आर्यसमाजकी आलोचना करता हूँ तो उसकी प्रशंसा भी करता हूँ । जो हार्दिक प्रशंसा करता है उसे आलोचना करनेका अधिकार भी है। ब्रिटिश साम्राज्यकी स्थापनाके बाद शिक्षित वर्गका जनताके साथ कोई आध्यात्मिक सम्बन्ध नहीं रहा । आर्यसमाजने इस सम्बन्धको पुनःस्थापित किया है; ऐसी मेरी मान्यता है । आज यहाँ जो दृश्य दिखाई दे रहा है, वह शायद ही कहीं और देखनेको मिलेगा । मैं आपका थोड़ा-बहुत अनुकरण करता हूँ । पर मुझे बाल्टियों में पैसा नहीं मिलता। मैं तो रूमालोंमें पैसा इकट्ठा करता हूँ। मुझे तो पैसे मिलते हैं और आपको रुपये मिलते हैं। सभी पंजाबी धनी नहीं हैं; कुछ गरीब भी हैं। पर आपका दिल उदार है। मैं आर्यसमाजकी आलोचना करता हूँ । आपसे कहता हूँ कि आप झगड़ा करनेवाले लोग हैं। पर आज मैं आपका ही काम करने यहाँ आया हूँ। क्योंकि मैं मानता हूँ कि गुरुकुलकी मार्फत हिन्दुस्तानकी सेवा हो रही है । आपकी आलोचना १. शंकराचार्य कृत चर्पटमंजरीसे । २. गांधीजीने यह भाषण श्रद्धानन्द स्मारक कोषके लिए की गई अपीलके समर्थनमें दिया था । Gandhi Heritage Portal