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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२२४

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१८६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय मुझको भी जब चाहे लीख सकते है । मूल (सी० डब्ल्यू० ४२७६ ) से । सौजन्य : चन्द त्यागी चि० ममा, १७३. पत्र : ममा डी० सरैयाको हरिद्वार फाल्गुन बदी ३, १९८३ [२१ मार्च, १९२७] तुम्हारा पत्र पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई। तुमने यदि क्रोध किये बिना और धर्म जानकर गंगाबहनको मुक्ति दी है तब तो तुम्हारा यह कदम निस्सन्देह बहुत अच्छा है और इसीसे तुम्हें शान्ति मिलेगी, क्योंकि तुम्हारा मन सुस्थिर हो गया होगा । यदि हमारा कोई प्रियजन अपना मन ईश्वरमें लगाये और समस्त जगतको अपना कुटुम्ब मानकर व्यवहार करे तो इससे हमें आनन्दित होना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि तुम्हें अब आराम होगा। मुझे फिर पत्र लिखना । स्याहीसे साफ-साफ अक्षर लिखनेका अभ्यास करना । गुजराती (सी० डब्ल्यू० २८१९) से । सौजन्य : पुरुषोत्तम डी० सरैया १७४. पत्र : फूलचन्द शाहको दुबार नहीं पढ़ा बापूके आशीर्वाद हरिद्वार फाल्गुन वदी ३, १९८३ [२१ मार्च, १९२७ ] भाईश्री ५ फूलचन्द, २,००० रुपयों सम्बन्धी आपका पत्र मुझे भेजा गया है। अब मेरे पास एक कौड़ी भी नहीं रही। सारी बचत खत्म हो गयी है और इसलिए मुझे फिरसे भिक्षा माँगनी होगी। इस बार तो मैंने उन्हें लिखा है कि जिस तरह हो सके उस तरह आपको रुपया भेज दें। लेकिन इसके बाद काम कैसे चलेगा ? अब आपको मुझसे बजट पास करवाना होगा। परिषदके चालू खर्चके लिए जरूरी पैसे उगाहनेकी शक्ति आपमें अर्थात् देवचन्दभाई और आपमें होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो हम कबतक चला सकेंगे ? Gandhi Heritage Portal