पत्र : गंगाबहन वैद्यको १८७ अन्य सब कार्यालयोंका बजट पहलेसे ही पास होना चाहिए। खासकर अपनी शालाका बजट आप नानाभाईको दिखा लिया करें। वे शालाका निरीक्षण करके जितना पैसा पास करें में उतना पैसा इकट्ठा करनेका प्रयत्न करूँगा । सब राष्ट्रीय शालाओंको में विद्यापीठके साथ मिला देनेका विचार किया करता हूँ, क्योंकि उनके लिए अलगसे पैसा माँगनेमें अब दिक्कत होती है । अनेक दान देनेवालोंसे खादीके लिए तो पैसा ले ही लिया जाता है । मैंने परिषदकी बैठकमें कुछ पैसे इकट्ठा करनेकी उम्मीद की थी लेकिन बैठक हुई नहीं । अब चूंकि परिषदकी बैठक अगस्त तकके लिए स्थगित हो गई है इसलिए हमें इस सवालपर फिरसे विचार करना इसलिए अब इसके बाद आप जो भी माँग करेंगे उसका बजट मुझसे पहलेसे पास करवा लेना । अन्ततः तो [ गुजरातकी | सब संस्थाओंको अपने पैरोंपर खड़ा होना पड़ेगा, ठीक वैसे ही जिस तरह सारे भारतवर्ष में है । अथवा हमें शिक्षाके सम्बन्धमें महागुजरात के लिए कोई खास योजना बनानी होगी। आप नानाभाईसे मिलकर इन सब बातोंपर विचार करें। हमारे पास तीन काम कहे जा सकते हैं, खादी, अन्त्यज [ - सेवा ] और सामान्य राष्ट्रीय शिक्षा । पड़ा । मेरे विचारसे तो यह तीनों खादीमें समाहित हैं; शिक्षा तो अवश्य समाहित है । अन्त्यजोंकी समस्याका अभी पूर्ण समाधान नहीं हो सका है। यह सब साथियोंके विचारके लिए लिख रहा हूँ । मेरे साथ पत्र-व्यवहार करके जहाँ आवश्यक लगे स्पष्टीकरण करा लें। उससे अनेक समस्याएँ सुलझ जायेंगी । यह पत्र चि० छगनलाल आपको पढ़कर भेजेगा, जिससे कि वे सब यह समझ सकें कि में इस समय कहाँ हूँ । [ पुनश्च : ] गुजराती (सी० डब्ल्यू ० २८३३) से । सौजन्य : शारदाबहन शाह १७५. पत्र : गंगाबहन वैद्यको बापूके आशीर्वाद हरिद्वार मौनवार [ २१ मार्च, १९२७] चि० गंगाबहन, तुम्हारा पत्र मिला। मैं उसे चि० किशोरलालको भेज रहा हूँ । किशोरलाल सत्यनिष्ठ और मुमुक्षु है । उसे जिस विषयमें सन्देह हो उसपर तुम्हें और मुझे पुनर्विचार करना होगा । अतः तुम्हें और मुझे उसे अपनी बात समझानेका प्रयत्न करना होगा, जिससे तुम्हारा कदम उसे धर्म विरुद्ध न जान पड़े। यदि चि० ममाका पत्र १. दौरेके कार्यक्रमके लिए देखिए " पत्र : क्षितीशचन्द्र दासगुप्तको ", १४-३-१९२७ । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२२५
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