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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२४०

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२०२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय मैंने उस समय भोलेपनमें यह सोचा था कि आप अपनी पढ़ी हुई किसी वास्तविक घटनाका उल्लेख कर रहे हैं। इसलिए फ्रांसीसी सदस्योंके दल जैसी उत्सुकतासे मैंने आपसे उसका विस्तृत विवरण पूछा। आपने कृपा करके मेरे प्रश्नका उत्तर स्वयं देते हुए कहा "मेरा खयाल था कि मेरे लेखसे यह बात पर्याप्त रूपसे स्पष्ट हो जाती है कि उक्त विवरण बिलकुल काल्पनिक था। " इसके बाद १९२५ में कलकत्तामें मिशनरियोंको सभामें आपने यह कहा : " में नहीं कह सकता कि इस सुन्दर भूमिमें रहनेवाले मनुष्य नीच हैं। वे नीच नहीं हैं; वे सत्यकी खोज उतनी ही आकुलतासे कर रहे हैं जितनी आकुलतासे में और आप कर रहे हैं, बल्कि शायद मुझसे और आपसे ज्यादा आकुलतासे हो। यह मुझे फ्रेंच भाषाकी एक पुस्तककी याद दिलाता है, जिसका अनुवाद एक फ्रांसीसी मित्रने मेरे पढ़नेके लिए किया था। इस पुस्तकमें ज्ञानकी खोजमें किये गये काल्पनिक अभियानका वर्णन है। इन यात्रियोंका एक दल भारतमें उतरता है और उसको एक पेरियाकी छोटीसी कुटियामें सत्य और प्रभुका मूर्तिमन्त रूप देखनेको मिलता है । अब इस बारेमें यदि आप अपनी 'आत्मकथा' में आगे और कुछ लिखनेवाले नहीं तो मैं आपका बहुत अनुगृहीत होऊँगा । यदि आप मुझे यह जानकारी दे दें कि उस पुस्तक और उसके लेखकका नाम क्या है, आपके लिए उसका अनुवाद किसने किया था, कब किया था और कहाँ किया था । आप यह जानकारी 'यंग इंडिया' में (या स्वयं मुझे पत्र लिखकर) दे सकते हैं। यह भी लिखें कि क्या वह अनुवाद प्रकाशित हुआ था और क्या वह इस समय उपलब्ध है ? मैं यह भी निश्चय करना चाहता हूँ कि यह यूल एण्ड बर्नेलके 'हॉब्सन-जॉब्सन में' (पेरिया शीर्षकके अन्तर्गत) उल्लिखित दो पुस्तकों में से तो एक नहीं है ? वह कहानी बर्नार्डीन डी सेंट पियरेकी लिखी है और उसका फ्रांसीसी नाम है शोमिये इन्डियन ( भारतीय झोंपड़ी) । कहानी अस्वाभाविक है; किन्तु वह कभी लोक-प्रसिद्ध थी। इस (पेरिया) शब्दसे जो एक गौरवकी भावना भ्रमवश जुड़ गई है, जो कैसीमीर डेलावीके नाटकमें चरमावस्थाको प्राप्त हुई है और जो कुछ इस शब्दसे अभीतक संलग्न है, उसका स्रोत भी वही पुस्तक तो नहीं है ? अवश्य ही फ्रांसीसी लेखकोंके बारेमें अंग्रेज आलोचकोंने जो मत प्रकट किया है उससे मेरी सहमतिका कोई प्रश्न नहीं उठता। मैं चाहता था कि मैं श्री नादकर्णीको, जो अपेक्षित है सो जानकारी पूरी तरहसे दे सकता। मुझे इस कहानीका नाम याद नहीं रहा है। इस पुस्तकका अनुवाद खास १. देखिए खण्ड २७, पृष्ठ ४५२ । Gandhi Heritage Portal