भाषण : घाटकोपरके सार्वजनिक जीवदया खातामें २०५ भरसक प्रयत्न कर रहे हैं। वे इन लोगोंके कहीं ज्यादा सम्पर्कमें हैं। मेलेके समय वे १० दिनतक हरिद्वारमें रहेंगे और खादी आन्दोलनमें साधु दिलचस्पी लेने लगें, इसके लिए वे यथासम्भव सब-कुछ करेंगे । खादी और मद्यनिषेध कार्य तथा अस्पृश्यता निवारणके लिए उन लोगोंकी सहायता प्राप्त करनेकी दृष्टिसे क्या आप और अधिक संख्यामें सम्मेलनोंका आयोजन करेंगे ? यह सही है कि साधु इन सब कामोंमें बहुत कुछ कर सकते हैं, पर इस वक्त मैं यह नहीं कह सकता कि मैं उनके साथ बातचीत करनेके लिए विशेष सम्मेलनोंका आयोजन करूँगा । पण्डित मालवीयजीने इस दिशा में कदम उठाया है और वे उनपर मुझसे ज्यादा प्रभाव डाल सकते हैं । भारतमें मद्यनिषेध जल्दी किया जा सके, इसके लिए आप प्रचारके किन खास तरीकोंका सुझाव देंगे । उचित सावधानी बरतते हुए शान्तिपूर्ण धरना फिरसे शुरू करनेके बारेमें आपका क्या विचार ? यदि जितनी चाहिए उतनी सावधानीके साथ धरना देना सम्भव हो तो मैं किसी समय भी उसका स्वागत करूँगा । परन्तु मैं नहीं जानता कि अब फिरसे धरना देना शुरू किया जा सकता है या नहीं। धरना देनेके लिए शान्तिपूर्ण वातावरणकी आवश्यकता होती है, लेकिन सवाल तो यह है कि क्या आज देशमें सचमुच ऐसा वातावरण है। मुझे जिस समय वातावरणके शान्तिपूर्ण होनेका विश्वास हो जायेगा उसी समय में स्वयं धरना शुरू करनेके लिए तैयार हूँ। लेकिन अभी इस समय मुझे ऐसा विश्वास नहीं है । [ अंग्रेजीसे ] बॉम्बे क्रॉनिकल, २५-३-१९२७ १८९. भाषण : घाटकोपर के सार्वजनिक जीवदया खाता में २४ मार्च, १९२७ गुरुवार की सुबह बम्बई सरकारके वित्त मन्त्री सर चुन्नीलाल मेहता और अहमदाबाद के वल्लभभाई पटेलके साथ गांधीजी घाटकोपर जीवदया खाता' देखने उन्हें संस्थाकी पशुशाला और पशु दिखाने के बाद ... संस्थाके मन्त्रीन उनका हार्दिक स्वागत किया। ... गये । - ... [उत्तर देते हुए] गांधीजीने कहा कि मैं [ संस्थाको देखकर ] बहुत ही प्रसन्न हुआ हूँ और जीवदया खाता समितिको बधाई देता हूँ । जबसे मैंने १९२५ में बेलगाँवमें गोरक्षा कार्य हाथमें लिया, तबसे मेरी बहुत इच्छा थी कि मैं इस संस्थाको देखूं । १. १९२३ में स्थापित एक संस्था। जिसका उद्देश्य बम्बई में दुधारू पशुओंके वथको रोकना और नागरिकोंको शुद्ध दूध देना था। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२४३
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