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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२५७

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२०६. पत्र : प्यारेलाल नैयरको -- - २८ मार्च, १९२७ मुझे उम्मीद है कि मेरे घायल होने की बात सुनकर तुम अधीर न हुए होगे । घायल होनेवालेकी मृत्यु भी हो सकती है। इस बारके प्रहारको तो स्पष्ट रूपसे चेतावनी समझना चाहिए. आज नहीं तो कल - मैंने तो १३ अप्रैल, १९२८ तककी अवधि निश्चित की है। बादमें तो संकटकी घड़ी बीत जानेपर व्यक्ति सौ वर्षतक भी जीवित रह सकता है। यदि जीवित रहेंगे तो कातेंगे और यदि काता नहीं गया तो हम जिन्दा रहनेसे इनकार कर देंगे यह बात तो उचित है न ? [ गुजरातीसे ] -- महादेव देसाईकी हस्तलिखित डायरी से | सौजन्य : नारायण देसाई २०७. पत्र : जमनालाल बजाजको [चि०] जमनालालजी, २८ मार्च, १९२७ तुम घबराये तो नहीं होगे। एक न एक दिन तो ज्योति बुझ ही जायेगी; अभी तो केवल मन्द ही हुई है । ज्योति क्षीण हो अथवा समाप्त हो, हमें दोनोंको एक समान ही मानना चाहिए। जो तेज प्रदान करता है, वह क्षीण भी होता है और अन्तमें बुझता भी है। [ गुजरातीसे ] महादेव देसाईकी हस्तलिखित डायरीसे । सौजन्य : नारायण देसाई १. बीमार होनेकी । Gandhi Heritage Portal