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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२६०

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२११. पत्र : मणिलाल और सुशीला गांधीको चि० मणिलाल तथा चि० सुशीला, निपाणी मौनवार २८ मार्च, १९२७] तुम दोनोंके पत्र आये। मुझे दुःख तो अवश्य हुआ । तनिक-सा भी झूठ मुझे भालेके समान चुभता है। सुशीलाको बालक और पराधीन समझकर मैं उसकी असावधानीको माफ कर सकता हूँ, लेकिन तुम्हारी असावधानीका कोई कारण न था । लेकिन अब जो हुआ सो हुआ मुझे आगे और वचन न देना। जो दिये हैं उनका पालन करो, मेरे लिए इतना ही बहुत है । मेरी बीमारीकी चिन्ता न करना । यहाँ आकर रहनेकी तो जरूरत ही नहीं है । अपना काम तुम एकनिष्ठ होकर करते जाओ, इसी में अच्छी सेवा है । देहका सम्बन्ध क्षणिक है । वह कोई सदा रहनेवाला नहीं है। उसका क्या शोक; इसपर विचार करना । तुम दोनों अच्छे रहो और शोभा पाओ गुजराती (जी० एन० ४७१४ ) से । -- यह मेरा आशीर्वाद और इच्छा है । बापूके आशीर्वाद २१२. पत्र : मणिलाल और सुशीला गांधीको चि० मणिलाल और सुशीला, [ मार्च, १९२७के अन्तमें] जानेसे पहले लिखा हुआ तुम्हारा पत्र मुझे मिला । आशा है, तुम निर्विघ्न पहुँच गये होगे । मैंने तुम्हें रेडियो भेजा था, लेकिन वह स्टीमरके रवाना होनेपर ही पहुँच सका । मैंने उसे तुम्हारे द्वारा दी हुई अवधिके भीतर ही भेजा था । जो व्यक्ति वचनका पालन करनेसे चूक जाता है वह और भी दृढ़ निश्चयवान बनता है । तुम वचनका पालन नहीं कर सके, इसलिए अब प्रतिज्ञा न लेनेकी प्रतिज्ञा ले बैठे । वह चढ़नेका नहीं अपितु गिरनेका रास्ता है, यह याद रखना । ईश्वर तुम्हारी रक्षा करे. २ गुजराती (जी० एन० ४७१५) से । १. मणिलाल और सुशीलाके दक्षिण आफ्रिका के लिए रवाना होनेके उल्लेखसे । २. पत्रका शेषांश उपलब्ध नहीं है। Gandhi Heritage Portal