२३४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय (४) आपकी सूर्य-भेदन व्यायाम पुस्तक भी मैंने पडली है। क्या आप वैसा जानते हैं कि इह व्यायाम मेरे जैसा मनुष्य भी केवल पुस्तककी मददसे कर ले तो भी के हानी नहीं हो सकती है ? (५) वेदके मंत्रोंके अर्थ करनेमें 'ऋग्वेदादि' भाष्य-भूमिकामें जो नियम दिये हैं उसमें और आपकी प्रणाली में कुछ भेदसा मुझको प्रतीत होता है। ये मेरा मन्तव्य ठिक है क्या ? अंबोली में मैं इस मासको अठारह तारिक तक हुँ । आपका, मोहनदास गांधी मूल (एस० एन० १२७७१) की फोटो नकलसे । भाईश्री ५ फूलचन्द, २२६. पत्र : फूलचन्द शाहको अम्बोली [ बरास्ता ] बेलगाँव सत्याग्रह दिवस [ ६ अप्रैल, १९२७ ] मैंने आपको पत्र लिखा था उसका जवाब नहीं मिला । तबीयत बिगड़ने से पैसा इकट्ठा करनेकी मेरी शक्ति काफी कम रह गई है। मैंने एक जगह कोशिश की भी किन्तु वहाँसे अभी मिलनेकी सम्भावना नहीं है । यदि मैं बीमार न हुआ होता तो जैसे-तैसे प्रबन्ध कर देता । भाई अमृतलाल 'बापा'के भाषणके विषयमें देवचन्द भाईको लिखनेके लिए मैंने महादेवसे कहा था । उसके विषय में पूरी तरह विचार कर लेना चाहिए। मुझे लगता है कि राजकीय परिषद और चरखा कार्य, ये दोनों प्रवृत्तियाँ अलग-अलग होनी चाहिए । ऐसा हो तो अच्छा रहे । खर्चकी तीन मदें हैं। उनकी व्यवस्था इस प्रकार की जाये । (१) खादी प्रवृत्ति चरखा संघको सौंप दें, क्योंकि यह मण्डल मेरे बाद भी बना रहेगा और यथाशक्ति अपना काम चलायेगा । (२) विद्यालयोंका और अन्त्यजोंकी सेवाका कार्य विद्यापीठको सौंप दें। वह भी मेरे जानेके बाद बना रहेगा । और (३) काठियावाड़की अलग प्रवृत्ति । इन तीनों विषयोंके सम्बन्धमें हम ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कर पाये हैं जो स्वतन्त्र रूपसे चल सके। इसलिए मुझे तो ऊपर सुझाई गई व्यवस्था ही ठीक लगती है। खादीका कार्य गुजरात खादी मण्डलको भी सौंपा जा सकता है • इस विषयमें भाई लक्ष्मीदासके साथ बातचीत करनेके बाद। इन तीन कार्योंके सिवा चौथी किसी चीजमें मेरा मन अभी नहीं लग सकता । १. लक्ष्मीदास आसर । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२७२
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