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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२७४

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२३६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय चम्पाका क्या हालचाल है ? प्रस्तावों आदिकी नकल 'नवजीवन 'में भी प्रकाशित होनी चाहिए थी । में तो जल्दीमें भाग निकला इसलिए तुमसे कहना भूल गया । किन्तु इन सारी चिन्ताओंका बोझ क्या तुम नहीं उठाओगे ? हरिइच्छा आदि विना किराया दिये भी रह सकती हैं । स्थानके सम्बन्धमें मगनलालसे पूछकर उन्हें बुला लो । यदि ऐसा लगे कि कहीं जगह नहीं निकल रही है तो हमें कुछ दिनों रुकना होगा । [ पुनश्च : ] पैसा भेज देनेके लिए रेवाशंकरभाईको में पहले ही लिख चुका हूँ गुजराती (सी० डब्ल्यू ० ७३९१) से । सौजन्य : वा० गो० देसाई २२८. पत्र : गंगाबहन वैद्यको मोहनदास चैत्र सुदी ५ [ ६ अप्रैल, १९२७] चि० गंगाबहन, तुम्हारे पत्र मिलते रहते हैं । तुम चि० ममाको देखने गई इससे तुम्हारी प्रतिज्ञा तनिक भी भंग नहीं होती। ऐसे अवसरपर जाना होगा, यह तो पहले ही सोच लिया था । अव चि० ममाको पूर्ण शान्ति मिलनेके बाद ही तुम आश्रम वापस जाना । चि० ममाको यह मंत्र जरूर देती रहना कि देह रहे या जाये उससे हमें क्या ? आत्मा थोड़े हो कहीं जा सकती है। हम अपनी देहकी चिन्ता किसलिए करें ? चिन्ता तो उस आत्माकी करें जो अमर है और प्रसन्न रहें । [ पुनश्च : ] मैं बिलकुल ठीक हूँ । गुजराती (सी० डब्ल्यू ० ८८२५) से । सौजन्य : गंगाबहन वैद्य बापूके आशीर्वाद १. गंगाबहन वैद्यकी पुत्री ममा बीमार थी और उसका देहान्त १९२७ में हुआ था। देखिए "पत्र : दामोदर लक्ष्मीदासको " और " पत्र : गंगाबहन वैद्यको १०-४-१९२७। 33 Gandhi Heritage Portal