पत्र : मीराबहनको २४७ मेरी लिखावटसे तुम समझ सकती हो कि में दिनोंदिन सशक्त होता जा रहा । कल मैं काफी घूमा । यह तो हुई अपनी बात । तुम्हारा घोड़े की सवारी करना सीखनेका विचार मुझे पसन्द है । इससे तुममें चैतन्य आयेगा और तुम गाँवोंमें जाकर थोड़ा-बहुत ग्रामीण जीवन देख सकोगी । क्या तुम्हारे लिए उन्होंने ठीक जीनका प्रबन्ध कर दिया है? तुम्हें हर प्रकारकी ग्राम्य हिन्दी समझनेका प्रयत्न करना चाहिए। मुझे तबतक सन्तोष नहीं होगा, जबतक तुम हिन्दीमें इतनी पारंगत न हो जाओ कि देहातियोंकी हिन्दी समझ और बोल सको। तुम भयभीत न होना । तुम्हें अपने कामसे प्रेम है, इसलिए तुम्हें उनकी हिन्दी समझना और बोलना आ जायेगा । मैं अधीर नहीं होऊँगा । परन्तु तुम्हारे कामके लिए हिन्दीका पूरा ज्ञान आवश्यक है। इसलिए तुम उसे जानने और बोलनेका मौका ढूँढ़ती ही रहना। तुम्हारे आसपास जो-कुछ हो रहा हो, उस सबको समझनेका आग्रह रखना | उस मोटी और सुन्दर महिला नूरबानूको तो तुम अवश्य ही जानती होगी । उसका तुम्हारे नाम एक पत्र है। उसने अभी हालमें आश्रमको अपने कई हजारके जेवर दिये हैं। वह अपने पतिके साथ इस समय महाबलेश्वरमें रहती है। दोनों मुझसे मिलने अभी यहाँ आये हैं। उन्हें उत्तर लिख देना । उसका पता महाबलेश्वर कालेज, महाबलेश्वर है । श्रीमती नूरबानू प्यारेअली उसका पूरा नाम है । मैं यह जानने के लिए उत्सुक हूँ कि नया चरखा कैसा चल रहा है। क्या तुमने वहाँ चरखे देखे हैं ? क्या तुम्हें अपने लिए अच्छे फल मिल जाते हैं ? सस्नेह, [ पुनश्च : ] महादेव और देवदास खादीकी फेरी लगाने गये हैं । अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू ० ५२१५) से । सौजन्य : मीराबहन बापू Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२८५
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