२४७. सभ्यता और संस्कृति ज्यूरिकके संस्कृत विद्वान डाक्टर मार्टिन हलीमैन ने मेरे पास हाइनरिख पैस्टा- लोजीके लेखोंमें से कुछ चुने हुए अंशोंका निम्न ज्ञानवर्द्धक अनुवाद' भेजा है । लेखकको मरे अभी १०० साल ही हुए हैं। डा० हर्लीमैनकी दृष्टिमें वे यूरोपके एक महानतम शिक्षा - शास्त्री थे और मानव जाति और मानवकी प्रतिष्ठाके लिए संघर्ष करनेवाले एक महानतम योद्धा थे । किन्तु यूरोपके लोग भी उनको ठीक-ठीक नहीं समझ सके और संसारके अन्य देशोंके लोग भी उनको लगभग जानते ही नहीं हैं । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १४-४-१९२७ प्रिय भाई, २४८. पत्र : वी० एस० श्रीनिवास शास्त्रीको अम्बोली १४ अप्रैल, १९२७ आपके पत्रसे मुझे अपार हर्ष हुआ। यह खबर पाकर हमारे अपने लोग और एन्ड्रयूज खुश हो उठेंगे । और यूरोपीय भी ऐसे व्यक्तिको पाकर खुश होंगे, जिसे वे जानते हैं और जिसका वे आदर करते हैं। मुझे आपके पत्रसे बड़ी राहत मिली और रही आपके स्वास्थ्य की बात । ईश्वर उसकी रक्षा करेगा । हमारे देशमें इस समय जो उथल-पुथल मची हुई है उससे दूर जाकर आपके थके हुए दिमागको भी चैन मिलेगा; इसके साथ ही देशकी अमूल्य सेवा भी होगी । आजकी उलझी हुई स्थिति न तो जल्दबाजी से सुलझ सकती है और न बहुत सोच-समझकर किये जानेवाले हस्तक्षेपसे ही । समय आनेपर वह अपने आप सुलझ जायेगी । श्रीमती शास्त्री से दक्षिण आफ्रिकामें आपको बड़ी सहायता मिलेगी और उनकी उपस्थितिका वहाँकी हमारी मूक बहनोंके लिए भी बहुत अर्थ होगा । आशा है कि मैं आगामी बुधवारको नन्दी हिल्स पहुँच जाऊँगा । आप जब भी आ सकें और आना चाहें कृपया आयें । हृदयसे आपका, मो० क० गांधी वी० एस० श्रीनिवास शास्त्रीके कागजात (पत्र व्यवहार सं० ४७० ) । सौजन्य : नेशनल आर्काइव्ज़ ऑफ इंडिया । १. यहाँ नहीं दिया जा रहा है। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२९३
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