पत्र : प्रभावतीकी २५७ इसी कारण मैंने आसनादिके बारेमें पूछा था। अब में समझ गया हूं कि आसनादि उस मार्ग में एक श्रेणी है और उसका प्रयोग साधकके लिये आवश्यक समझा जाय । क्या मेरा कहना मैं स्पष्टतया समझा सका हूं ? वीर्यरक्षक आसनोंके बारेमें आपने पुस्तकमें लिखा है वह मैं समझ गया था । सूचना सावधान करती है। सिद्धासनादिसे गृहस्थके लिये भी कोई हानि नहीं देखता हूं । सिद्धासनसे यदि संभव है तो गृहस्थ स्थिर वीर्य बनेगा न तो निर्वीर्य । केवल सन्ततिके लिये ही स्त्री संग करनेवाले गृहस्थ आज कितने मीलेंगे ? यदि विकारके लिये शांत शब्दका प्रयोग हो सकता है तो सिद्धासनादिसे गृहस्थ शांत विकार होगा । हां! यदि उसका लक्ष्य निरविकारता है तो दूसरी बात है । आप पुराणोंका त्याग नहीं करते हैं। यह देखकर मुझको शांति हुई है। मुझे डर था कि आप पुराणोंका निरादर करते होंगे। मेरा तो यह निश्चय है कि लोग जब नास्तिक बन रहे थे तब पुराणियोंने आलंकारिक और काव्यमयी वाणीसे धर्म जागृति की । हमारे शास्त्रोंका हमारे आधुनिक युवकोंके लिये और आधुनिक ज्ञानकी दृष्टिसे नया अनुवाद करना है जैसा आप कर रहे हैं । मेरे स्थिर होनेसे यदि हो सकता है तो आपको मेरे पास आनेका कष्ट देना चाहता हूं जिससे हम विचारोंकी लेन-देन करें। लूंगा । अब तो में 'केनोपनिषद' पढ़ रहा हूं। उसके बाद 'महाभारत' की समालोचना आपका, मूल (एस० एन० १२७७१) की फोटो नकलसे । २५०. पत्र : प्रभावतीको मोहनदास नन्दी हिल्स, मैसूर' चि० प्रभावती, चैत्र सुदी १३ [ १४ अप्रैल, १९२७] तुमारा ख्याल तो मैं बहोत ही करता हुं ! अब कैसे चलता है ? तुमारा आश्रम जाना कब होगा ? विद्यावतीका स्वास्थ्य कैसा है ? में लीखुं या न लिखु तुमारे तो लीखते ही रहना । मेरा स्वास्थ्य अब तो कुछ ठीक है । मूल (जी० एन० ३३२९ ) की फोटो - नकलसे । बापूके आशीर्वाद १. गांधीजी अम्बोलीसे नन्दी हिल्स १८-४-१९२७ को रवाना हुए थे; देखिए " पत्र : मीराबहनको", १८-४-१९२७ । नन्दी हिल्सका पता निश्चय हो इस कारण दिया गया है कि प्रभावती उन्हें इस पतेपर उत्तर दें। ३३-१७ Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२९५
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