२६० सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय रानी धन्यवादके भाव सहित मुस्कराई। गांधीजीने आगे कहा : आपने जो स्वल्प परिमाणमें खादी खरीदी, उसपर मुझे आश्चर्य नहीं हुआ । मुझे मालूम था कि आपके साधन सीमित हैं; और आपको अपनी आमदनीमें ही निर्वाह करना चाहिए और अब मुझे मालूम हुआ है कि महाराजाके समान आप भी अपनी प्रजासे बहुत मिलती-जुलती रहती हैं। क्या मैं आपको यह सुझाव दूँ कि यदि आप कताई कलामें प्रवीणता प्राप्त कर लें तो अपनी जनसेवाका प्रभाव और भी अधिक बढ़ा लेंगी ? बातचीतकी इस अवधि में गांधीजी चरखा चलाते रहे। रानीने सिर हिलाकर सहमति प्रकट की। और प्रमुखने कहा: “हमारे पास इतनी ही खादी नहीं है। कुछ हमने गतवर्षकी खादी प्रदर्शनीमें खरीदी थी, और जब कभी आवश्यकता होगी हम आपसे और ले लेंगे।" इस बीच महाराजा सारा समय कोट और निकर पहने हुए फर्शपर बैठे रहे । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २८-४-१९२७ २५३. पत्र : मीराबहनको १८ अप्रैल, १९२७ चि० मीरा, तुम्हारे पत्र मिले । तुम्हें अपने आपपर कामका ज्यादा बोझ नहीं डालना चाहिए । अगर पढ़ानेसे तुमपर बहुत बोझ पड़ता है, तो उसे जरूर कम कर देना चाहिए और इसी तरह पढ़ना भी कम कर देना चाहिए। तुम्हें अपने आसपासके लोगोंको साफ बता देना चाहिए कि तुम्हारी शारीरिक शक्ति कितनी है। तुम्हें अपनी तन्दुरुस्ती किसी भी कारण गिरानी नहीं चाहिए। क्या तुम्हें उपयुक्त फल और दूध मिल जाते हैं ? मैं उत्तरोत्तर स्वास्थ्य लाभ कर रहा हूँ। पिछले दो दिनोंसे सुबह-शाम दोनों समय घूमने जाता हूँ। इससे मुझे कोई हानि नहीं हुई है । तुम्हें मालूम है कि मैंने अपने भोजनमें एक फल कम करके सब्जी लेना शुरू कर दिया है और भाकरी ले रहा हूँ । हम अम्बोलीसे आज रवाना हो रहे हैं और कार्यक्रम ठीक चला तो कल बेलगाँवसे चल देंगे। अगले दो महीनेतक पता : नन्दी हिल्स, मैसूर, रहेगा । इस स्थानको छोड़ते समय मुझे काफी दुःख तो जरूर महसूस होगा। यह जगह ही रमणीय है । परन्तु मुझे इस स्थानसे ममत्व इस कारण हो गया है कि यहाँके राजाका चरित्र असाधारण है । अबतक मुझे मिली सभी खबरोंके आधारपर वे आदर्श राजा मालूम देते हैं । वे अपने निजी खर्चके लिए रियासतकी आमदनी में से एक Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२९८
दिखावट