पत्र : गंगाबहन वैद्यको २६१ बँधी रकम लेते हैं । वे अपनी प्रजासे खुलकर मिलते-जुलते हैं और अपने १२५ गाँवोंमें से हरएक में गये हैं । वे संयमी जीवन व्यतीत करते हैं और उनकी पत्नी भी उनके ही अनुरूप हैं। में उनसे कई बार मिला हूँ और उनके स्पष्ट और सरल व्यवहारसे मुझे खुशी हुई है। इसी कारण मैं इस स्थानको इतना अधिक पसन्द करता हूँ । मगर हम सदा ही वह नहीं कर सकते जो हमें पसन्द है । हम कुछ घंटेके भीतर रवाना हो जायेंगे । मुझे आशा है कि नये चरखेकी बाबत तुम मुझे सूचना दोगी । आश्रमके सदस्योंने तो चमत्कार कर दिया है। केशुने २४ घंटे में १५,००० गजसे ज्यादा सूत काता है । सस्नेह, अंग्रेजी (सी० डब्ल्यू० ५२१७) से । सौजन्य : मीराबहन चि० गंगाबहन, २५४. पत्र : गंगाबहन वैद्यको बापू मौनवार, चैत्र बदी [१, १८ अप्रैल, १९२७] तुम्हारा पत्र मिला । तुम्हारी सभी शुभेच्छाएँ पूर्ण हों और ईश्वर तुम्हें अपनी प्रतिज्ञाओंका पालन करनेकी शक्ति दे । बालकोंके विषयमें तुम्हारा विचार बिलकुल ठीक है । परन्तु तुम्हारे आश्रम में होनेके कारण यदि दामोदरदास लड़कोंको तुम्हें सौंपता है तो उनकी देखरेखका दायित्व स्वीकार करना शायद तुम्हारा धर्म हो सकता है। अलबत्ता, आश्रमको सुविधा होनी चाहिए। इस विषयमें काकाके साथ बात करना । तुम्हारा मन न कहे तो दूसरी बात है । इस वारेमें हमारा धर्म ठीक क्या है, यह एकदम स्पष्ट नहीं होता । आज यहींसे नन्दी हिल्स जानेके लिए रवाना होंगे। अब पत्र वहीं लिखना । मैं मानता हूँ कि फिलहाल तुम काकाके पास ही रहोगी, इसलिए यह पत्र काकाके पतेपर ही भेजता हूँ । गुजराती (सी० डब्ल्यू ० ८८२८) से । सौजन्य : गंगाबहन वैद्य बापूके आशीर्वाद १. साधन-सूत्रमें तारीख चैत्र बदी २ है और उस दिन १९ अप्रैल थी। पर गांधीजी नन्दी हिल्सके लिए १८ अप्रैलको रवाना हुए थे। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/२९९
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