१२. भेंट : 'फ्री प्रेस ऑफ इंडिया के प्रतिनिधिसे मुजफ्फरपुर २५ जनवरी, १९२७ फ्री प्रेसके प्रतिनिधि द्वारा भेंट किये जानेपर महात्मा गांधीने अमेरिका यात्राके लिए मिले निमन्त्रणोंके बारेमें अपनी राय व्यक्त की। महात्माजीने सीधे-सादे ढंगसे कहा कि इन ललचानेवाले निमन्त्रणोंको स्वीकार करनेमें मुझे कुछ असमंजस हो रहा है । लेकिन मैं अभी अपने जीवनकार्यका वांछित लक्ष्य प्राप्त करनेमें सफल नहीं हो पाया हूँ । जबतक मेरी उपलब्धियाँ एक निश्चित ठोस रूप धारण नहीं कर लेतीं तबतक में उन विदेशोंकी यात्रा नहीं करना चाहता जो सौजन्य पूर्वक मुझे आमन्त्रित कर रहे हैं। महात्माजीने आगे कहा कि भारतीयोंकी सेवाके लिए मुझे अमेरिकामें एक बड़ी थैली दी जानेवाली है; लेकिन मुझे लगता है कि उससे हमारी आत्म- निर्भरता और आत्मसम्मानको क्षति पहुँचेगी। [ अंग्रेजीसे ] हिन्दू, २९-१-१९२७ १३. भाषण : मुजफ्फरपुरके मिशन स्कूलमें a २५ जनवरी, १९२७ [ नगरपालिका आयुर्वेदिक ] औषधालय देखनेके बाद गांधीजी रामकृष्ण मिशन देखने गये और संन्यासियों तथा कार्यकर्त्ताओंने उनका स्वागत किया। उन्हें आश्रम और उससे संलग्न अस्पताल दिखलाया गया। इसके बाद वे भारतीय ईसाई लड़कियोंका मिशन स्कूल देखने गये। कई लड़कियाँ चरखा चलाती दिखलाई पड़ीं। वे सब नौसिखिया मालूम देती थीं । महात्माजीने देखरेख करनेवाली यूरोपीय महिलासे कहा कि छात्राओंसे चरखा सोखनेकी अपेक्षा करनेसे पहले आप खुद चरखा चलाना सीखें। सभा भवनमें मेजपोश विदेशी कपड़ेका था; और सभी लड़कियाँ तथा उनके शिक्षक विदेशी कपड़े पहने थे । इसपर महात्माजीने कहा कि कताईमें विश्वास करनेसे पहले आप लोगोंको खद्दरमें आस्था होनी चाहिए। अध्यक्ष द्वारा कुछ कहने का अनुरोध किये जाने पर महात्माजीने कहा कि मेरे पास आपके लिए खादीके अलावा दूसरा सन्देश नहीं | आप जिस धर्मको मानना चाहें, मानते रहें, लेकिन अगर गरीबोंके प्रति आपके मनमें प्यार नहीं है, तो आपकी प्रार्थना ईश्वर द्वारा सुनी जानेकी कोई सम्भावना नहीं है । भारतको विशिष्ट परिस्थितियोंमें गरीबोंके प्रति प्यारकी अभिव्यक्ति खादी पहननेके Gandhi Heritage Portal
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