१५. भाषण : मुजफ्फरपुरके विद्यार्थियों को सभामें' २५ जनवरी, १९२७ गांधीजीने कहा कि मुझसे जब मुजफ्फरपुरमें विद्यार्थियोंकी एक सभामें भाषण देने को कहा गया तो मैं किसी भी अन्य प्रलोभनके बिना राजी हो गया; क्योंकि मुझे याद है कि जब में अपना चम्पारनका कार्य शुरू करने आया था तो पहले दिन मुजफ्फरपुर के विद्यार्थियोंने ही मुझे आश्रय दिया था। वह घटना, मैं भुला नहीं सकता । और यहाँके विद्यार्थियोंके समक्ष भाषण देनेका सुअवसर मैंने तत्काल यह सोचकर स्वीकार कर लिया कि इस समय जब मुझे भारतके विद्यार्थी समुदायसे बहुत ज्यादा मददकी जरूरत है, यहाँके विद्यार्थी शायद मुझे मदद पहुँचायेंगे । उन्होंने कहा कि आप मुझे १९२० की याद दिला देते हैं। निश्चय ही वे बड़े शानदार दिन थे, निश्चय ही उन दिनों देशमें राष्ट्रीय चेतनाका जो प्रखर उभार दिखाई देता था वह अब दब गया है, लेकिन उस आन्दोलनका असर अब भी बाकी है। यदि आप उस जोशके उभारको बनाये नहीं रख सके हैं, तो केवल आप ही उसके लिए दोषी नहीं हैं । स्वाभाविक ही है कि मैं देशकी बदली हुई परिस्थितियों में आप लोगोंसे वही काम करनेको नहीं कहूँगा; पर मैंने तब स्वतंत्रता संघर्षका जो रास्ता सुझाया था, वही अब भी भारतीयों द्वारा अपनाने योग्य सर्वोत्तम रास्ता है। यदि आप उस रास्तेपर बहुत लम्बे समयतक नहीं चल सके, तो उसके लिए शर्मिन्दा होने की जरूरत नहीं है । मुझे इस बातपर आश्चर्य नहीं है कि आप आगे कूच करते हुए रुक क्यों गये, बल्कि देशकी हालत देखते हुए मुझे इस बातपर आश्चर्य होता है कि उन दिनों आप इतना आगे बढ़ ही कैसे सके थे। जो कार्यक्रम मैंने बताया था, यदि वह अमल में लाया जा सकता तो सफलता मिलने में सन्देह ही नहीं था, लेकिन अब में तबतक उस कार्यक्रमके अनुसार काम करनेके लिए आपसे नहीं कहूँगा जबतक कि उसके लिए उपयुक्त अवसर नहीं आ जाता। लेकिन इस बीच मुझे आपसे एक काम करनेको कहना है और वह है खद्दरका काम। बड़े-छोटे, अमीर-गरीब, विद्वान-मूर्ख, विद्यार्थी या सरकारी कर्मचारी सभी लोग आसानीसे इस काममें जुटकर इसे सफल बना सकते हैं। विद्यार्थी समुदाय इस कामके लिए विशेष रूपसे उपयुक्त है। पंडित मालवीयने हिन्दू विश्वविद्यालयमें दृष्टांत प्रस्तुत करके आपका मार्गदर्शन कर दिया है । कल ही हिन्दू विश्वविद्यालयके विद्यार्थियोंने मुझे एक हजार रुपयेकी थैली भेंट की है। आपने जो थैली भेंट की है वह मुजफ्फरपुर के विद्यार्थियोंकी संख्याको देखते १. यह सभा शामके ६ बजे टाउन हॉलमें हुई थी। Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/५४
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