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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/५४१

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पत्र : मीराबहनको ५०३ जो विवाह क्या चीज है जानती नहीं है और जिसका विवाह किया जाता है और पीछे नामका पति मर जाता है ऐसी बालिकाको विधवा माना जाये ? ऐसे ऐसे प्रश्न जो विधवाकी स्थिति में से उपस्थित होते हैं वे सब धर्मके हैं, दयाके हैं और उसका निर्णय करनेमें हम किसी और देशकी स्थितिका मुकाबला न करें परन्तु धर्म क्या बताता है उसीको केवल देखें । इसी तरह देखनेपर मुझको तो ऐसा प्रतीत होता है कि जितनी बालविधवायें हैं उन सबका विवाह कर देना हिंदु जातिका कर्तव्य है । मूल (एस० एन० १२८२१) की फोटो नकलसे । चि० मीरा, ४८८. पत्र : मीराबहनको आपका, १२ जून, १९२७ तुम्हारे कई पत्र मिले। उन्हें पढ़कर दुःख होता है । परन्तु यह लाभप्रद है । तुम्हारे वहाँ जानेके पीछे एक प्रयोजन था । जमनालालजीने संलग्न तार' भेजा है। इसलिए मैंने तुम्हें शनिवारको साबरमतीके पतेपर तार भेजा था कि यदि तुम्हें वहाँ ठीक न लगता हो तो यहाँ आ जाओ, क्योंकि मुझे जमनालालजीके तारका यही अभिप्राय मालूम पड़ा । में हमेशा यही मानकर चलता हूँ कि तुम स्वाभाविक तरीकेसे काम करोगी और जब भी मैं तुम्हारे सम्बन्धमें तुम्हें पत्र या तार भेजूंगा, उसे अक्षरशः वैसे ही अर्थोंमें ग्रहण करोगी । यदि मुझे तुम्हारी आवश्यकताओंका और तुम्हें मेरी इच्छाओंका अनुमान लगाते रहना है तो मैं तुम्हारा पथ-प्रदर्शन नहीं कर सकता। इसलिए तुम्हें अपनी उन्नतिके लिए जो काम जरूरी मालूम दे, बिलकुल वही करो । यदि तुम्हें वैसे भी आश्रममें रहना पड़े तो में नहीं समझता कि तुम्हें इस सम्बन्धमें चिन्ता करनेकी जरूरत है कि तुम वहाँ बिना हिन्दी सीखे रह रही हो । गंगूका बड़ा ध्यान रखना है। यदि वह तुम्हारा बहुत ज्यादा समय न लेकर तुम्हारे साथ रहे, तो कोई बात नहीं । परन्तु क्या करना चाहिए यह तो तुम्हीं सबसे ज्यादा अच्छी तरह जानती हो । उसे तुम्हारे अध्ययनमें विघ्न नहीं डालना चाहिए। बल्कि उलटे वह एक तरहसे तुम्हारी सहायक ही हो सकती है। वह इसलिए कि तुम्हें हमेशा उससे हिन्दी में ही बातचीत करनी चाहिए। इससे तुम्हें बोलनेका अनिवार्य अभ्यास हो जायेगा । परन्तु यह इस विषयपर मेरा अपना दृष्टिकोण है । १. दिनांक ११-६-१९२७ का तार जो इस प्रकार था : “ मैं और मगनलालजी रिवाडी गये। चिन्ताकी कोई बात नहीं मोरावहन गंगूबहन वालुंजकरजी साबरमती जा रहे हैं। मैं स्वयं उदयपुर जा रहा हूँ। मेरा खयाल है कि आप मीराबहनको बंगलोर बुला लें। उन्हें अपने निर्णयको सूचना तारसे दें। " २. देखिए " तार : मीराबद्दनको", ११-६-१९२७ । Gandhi Heritage Portal