सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/५४४

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

५०६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय जब उस मानसिक समंजनसे हमारा व्यक्तित्व पूरी तरहसे रंग जाये और उसीका एक अंग बन जाये। मैंने सुझाव दे दिये हैं। उन्हें अपने मनकी प्रयोगशालामें स्थान बना लेने दीजिए । जब आप अपनी वकालत जारी रख रहे हों, मैं चाहूँगा कि चाहे मनोरंजनके रूपमें ही सही, आप कुछ दिन खादी प्रतिष्ठान, सोदपुरमें और कुछ दिन अभय आश्रम, कोमिल्ला में गुजार कर खादीकी प्रक्रियाका अध्ययन करें। उनकी शाखाओंमें जायें और देखें कि वहाँ कामकाज कैसे चल रहा है । और यदि आपको थोड़ा अवकाश मिले तो आप सत्याग्रहाश्रम, साबरमती जायें; वहाँ रहनेवाले प्रत्येक परिवारके इतिहासका अध्ययन करें। वहाँ पुरुषोंके साथ-साथ महिलाएँ क्या कर रही हैं, यह देखें । उनसे जिरह करें और यह पता लगायें कि क्या वे बदली हुई स्थिति में सचमुच प्रसन्न हैं। उसके बाद राजगोपालाचारीके आश्रममें जायें, यह देखें कि कर्नाटकमें गंगाधरराव अपने इलाके में क्या कर रहे हैं। जब आप इतना कर चुकेंगे तो आपको इस बातका कुछ आभास मिल जायेगा कि मेरा क्या अभिप्राय है । मनके सारे भावोंको शब्दों द्वारा प्रकट करना वास्तवमें बहुत कठिन है । भाषाकी अपनी सीमा है । और इसलिए भाषा विचारोंको व्यक्त करनेका अत्यन्त अक्षम माध्यम है । अन्तमें यह कहूँगा कि यदि आपका जरा भी मन हो तो आप बंगलोर अवश्य आइये और कुछ दिन मेरे साथ बिताइये। मुझे यहाँ इस महीनेके अन्ततक विश्राम करना है । आपने सुभाष बोसके बारेमें जो कुछ कहा है, वह मेरे ध्यानमें है । मैं सुभाष । बोसपर समाचारपत्रों द्वारा यथासम्भव निगाह रख रहा हूँ । यदि आप उन्हें मिलें तो कृपया कहें कि में प्रायः उन्हें याद करता रहता हूँ। उनके छूटनेके तत्काल बाद मैंने उन्हें तार भेजा था। उन्हें तार मिला या नहीं, मैं यह जाननेके लिए उत्सुक हूँ। मैं उनसे कोई उत्तर नहीं चाहता। मैंने इसका जिक्र सिर्फ इसलिए किया है कि आपने यह बड़ा अच्छा किया कि उनके बारेमें मुझे समाचार दिया। इसकी मैं कद्र करता हूँ । अंग्रेजी (एस० एन० १२५८७ ) की फोटो - नकलसे । हृदयसे आपका, Gandhi Heritage Portal