FAFERENCE DOOK भाषण : मुजफ्फरपुरके विद्यार्थियोंकी सभामें 8826 १७ हुए उससे बहुत कम है। मैं विद्यार्थियोंसे आशा रखता हूँ कि वे अपनी सारी आर्थिक और शारीरिक शक्तिसे खद्दर आन्दोलनकी सहायता करेंगे। मुझे आशा है कि मुजफ्फरपुरके विद्यार्थी देशके अन्य भागोंके विद्यार्थियोंसे पीछे नहीं रहेंगे। आप न सिर्फ आजके दिन ही धनसे सहायता करेंगे अपितु मुझे आशा है कि आप अपने जेब खर्चसे कुछ बचाते ही रहेंगे और नियमित रूपसे आन्दोलनकी सहायता करते रहेंगे। आप लोग प्रान्तीय खादी संगठन के मुख्यालयमें रह रहे है; इसलिए आपको खद्दरके कामके सभी पहलुओंको सीख लेना चाहिए और अपने अवकाशका समय भी इस काम में लगाना चाहिए। में तो आपसे कहूँगा कि आप प्रतिदिन कमसे कम आधा घंटा भी कातें। आप अपने लिये पैसा कमानेके लिए नहीं बल्कि गरीब और बेकार सूत ग्रामीणोंके लिए उदाहरण प्रस्तुत करनेके लिए सूत कातें । परन्तु यह सब कुछ आप तभी करें जब आपकी खादीमें श्रद्धा हो । वैसी श्रद्धा प्राप्त करनेके लिए आप मुझसे या अन्य किसी व्यक्तिसे खादीका अर्थशास्त्र समझ लें । भाषण जारी रखते हुए गांधीजीने खद्दरके आर्थिक पहलूपर विस्तारसे प्रकाश डाला और कहा कि यदि आप मानव हैं तो आपमें अपने आसपासके मनुष्योंके प्रति सहानुभूति अवश्य होनी चाहिए। यदि आपमें भाईचारेकी इतनी भी भावना नहीं है, तो आप स्वराज्य पानेकी आशा कैसे कर सकते हैं ? भारतके सच्चे सपूत होनेके नाते आपका यह कर्त्तव्य है कि आप उन सब वस्तुओंको अस्वीकार कर दें जो प्रत्येक भारतीयको उपभोगके लिए सुलभ नहीं हो पातीं। पर मैं आपको ऐसा करनेके लिए नहीं कह रहा हूँ। मैं तो यह चाहता हूँ कि आप खादी खरीदें और इस तरह हजारों बेकार देशवासियों और महिलाओंको काम और भोजन दें। विद्यार्थियोंपर खादी पहननेका प्रतिबन्ध नहीं है। उन्होंने विस्तारसे बताया कि जब राजगोपालाचारीको मद्रासके एक सरकारी कालिजमें खद्दरपर बोलनेके लिए आमन्त्रित किया गया तब वे किस तरह प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की सहायतासे उस कालिजमें खादी संघ चलानेमें सफल हुए। उन्होंने आशा प्रकट की कि मुजफ्फरपुरमें भी उस कालिजके दृष्टांतका अनुसरण किया जाएगा। खद्दरकी अर्थ-व्यवस्थाके सिद्धान्तको समझनेके लिए पुरस्कृत निबन्धका पढ़ना आपके लिए लाभदायक होगा। मुझे आशा है कि पुस्तकको पढ़ चुकनके उपरान्त खादीमें आपकी आस्था हो जाएगी। उन्होंने कहा : खद्दर पहननेके विरोधमें केवल एक आपत्ति रह जाती है और वह है फैशन और आरामके प्रति मोह । मैं आपसे पूछता हूँ कि यदि आप देशके लिए इतना छोटा-सा त्याग भी नहीं कर सकते, तो स्वराज्य पानेकी आशा कैसे कर सकते हैं? उन्होंने विद्यार्थियोंसे उसी स्थानपर निष्ठापूर्वक यह प्रतिज्ञा करनेका आग्रह किया कि वे आजके बाद कभी सिवाय खादीके १. अभिप्राथ वरदाचारी और पुणताम्बेकरके निबन्धके आधारपर प्रस्तुत पुस्तिकासे है; पुस्तकके संक्षिप्त विवरणके लिए देखिए खण्ड ३२, पृष्ठ ५१४ । ३३-२ 8826 -- [1 1 DEC 1987 Gandhi Herita ortal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/५५
दिखावट