५१२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय परन्तु इस पत्रके लिखनेका वास्तविक प्रयोजन यह पूछना है कि क्या में अपने पुत्र देवदासको अब आपके पास भेज दूँ ? कुल मिलाकर उसकी सेहत अब बहुत अच्छी हो गई है। सिवाय एक बारके कभी उसकी नाकसे खून नहीं वहा । यदि देवदासने आपकी बातको ठीक तरहसे समझा है, तो उसने मुझे बताया था कि आप वापसीमें उसे देखना चाहेंगे और उसकी परीक्षा और भी बारीकीसे करना चाहेंगे । यदि आपकी ऐसी राय हो तो वह जिस दिन आपको सुविधा हो आपके पास आ सकता है । १९ के बाद उसकी कुछ समयतक लगातार बंगलोर में जरूरत रहेगी । डा० थॉमसन चिकबल्लापुर अंग्रेजी (एस० एन० १४१५४ ) की फोटो नकलसे । ४९८. पत्र : गुलजारीलाल नन्दाको हृदयसे आपका, कुमार पार्क बंगलोर १५ जून, १९२७ प्रिय गुलजारीलाल, आपका पत्र और मन्त्रीके लिए तैयार किया हुआ आपका मसविदा मिला। आप चाहें तो पत्र भेज दें। मैं इसमें किसी तरहके परिवर्तन अथवा सुधारका सुझाव नहीं देना चाहता । परन्तु में केवल इतना ही कहूँगा कि सारे मामलेके बारेमें मेरा क्या विचार है, और हम किस हदतक मिल मालिकोंकी सहायतापर निर्भर रह सकते हैं एवं वे मिल-मालिक स्वयं वर्तमान परिस्थिति में किस हदतक सहायता दे सकते हैं । जहाँतक १२,५०० रु० का सम्बन्ध है, मुझे आशंका है कि हम तबतक यह रुपया नहीं ले सकते जबतक कि कस्तूरभाई, जो अपना हिस्सा वापस लेनेकी जिद कर रहे हैं जैसा कि शायद उन्हें करना भी चाहिए, दूसरे दाताओंको भी ऐसा ही करनेके लिए न कहें। इसलिए जहाँतक इन रुपयोंका सम्बन्ध है, इसी तरीकेसे काम लिया जा सकता है । अन्तिम निर्णय मिल-मालिकों द्वारा प्रासंगिक विषयों एवं निजी पसन्द तथा नापसन्दगीको ध्यान में रखते हुए लिया जायेगा । ये कमजोरियाँ हमेशा हमारे साथ रहेंगी और हमें यथोचित धैर्यसे इन कमजोरियोंको सहन करना ही होगा । परन्तु विचारके लिए अधिक महत्त्वपूर्ण विषय वह सिद्धान्त है जो मिल मालिकों या सामान्य रूपसे कहें, तो पूंजीपतियोंके साथ हमारे सम्बन्धोंके विषय में हमारा निर्देशन Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/५५०
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