1'9 AUG 1970 परिशिष्ट परिशिष्ट १ 8826 सकलातवाला के गांधीजीको लिखे पत्रके कुछ अंश निम्नलिखित अंश गांधीजीके नाम सकलातवालाकी खुली चिट्ठीमें से लिये गये हैं: प्रिय साथी गांधी, हम दोनों इतने अक्खड़ तो हैं ही कि बजाय शब्दाडम्बरमें उलझकर रह जानेके एक दूसरेको अपनी बात बेधड़क साफ-साफ कह सकनेकी अनुमति दे सकते हैं। कुछ मौकोंपर आपसे अपनी बातचीत के दौरान मुझे ऐसा लगा कि मजदूरों और किसानोंके संगठन के महत्त्वके सम्बन्धमें आप कोई निश्चित मत नहीं रखते । आप आग्रहपूर्वक यही कहते रहे कि चरखा आन्दोलन ऐसा संगठन तैयार कर रहा है । मैं जोर देकर इस बात से इनकार करता हूँ . भारत में सदियोंसे लाखों स्त्री-पुरुष लगभग समान परिमाणमें चावल और पानीको इस्तेमाल करते हुए भात बनाते और खाना पकाते चले आ रहे हैं. इन सभी क्रियाओंके बलपर निश्चय ही कोई कताईका काम भी इस दिशा में खाना पकानेके संगठन खड़ा नहीं हो सका है और कामसे कदापि कुछ अधिक नहीं कर सकता ।... सन् १९०० से पूर्व जो नेतागण मुक्तिकी आशाएँ बँधानेके लिए काम करते थे... लोकप्रिय नेता थे; जैसे ब्रिटेन के लोगोंके लिए ग्लैड्स्टन, जर्मनीके लोगोंके लिए बिस्मार्क या आयरलैंडके लोगोंके लिए पारनेल या भारतीयोंके लिए दादाभाई, फिरोजशाह और सुरेन्द्रनाथ । सन् १९०० तक लोग [ इस सबसे ] उकता गये और उनके दिलोंमें आग सुलगने लगी। परिवर्तन बहुत तेजीसे और सब जगह आया । केवल वे ही लोग नेता माने गये जिन्होंने दिलकी उस सुलगती ज्वाला और पीड़ित जनताकी विद्रोही भावनाको व्यक्त किया । इनका पहला काम यह था कि इन्होंने जनताकी अव्यक्त आवाजको साफ शब्दोंमें बेधड़क व्यक्त किया। इन नेताओंने दूसरा काम यह किया कि उन्होंने पुरानी व्यवस्थासे काम चलता रहे, इस बातको सर्वथा असम्भव बना दिया। उनका तीसरा काम था पुनर्निर्माण; उन्होंने परिश्रमसे तथा धीरे-धीरे नवजीवनका निर्माण किया। आयरलैंडने डी'वैलेराको जन्म दिया। उन्होंने उक्त पहला और दूसरा काम किया और अब उनके देशवासी उनके तीसरे कामको बहादुरीके साथ अंजाम दे रहे हैं। रूसने लेनिनको जन्म दिया। उन्होंने पहला और दूसरा काम किया तथा यद्यपि उनका जीवनकाल दीर्घ नहीं रहा था उन्होंने तीसरे कामके लिए अपने लोगोंको सही रास्तेपर चलाया। टर्कीने कमालको जन्म दिया। उन्होंने पहला और दूसरा काम किया और सौभाग्य से वे अब भी अपना Gandhi ધ સુહા સા 4 8826 e Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 33.pdf/५५५
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